मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार प्रदेश के 80 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक वेलनेस सेंटर स्थापित करने जा रही है। इन सेंटरों में योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक उपचार, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पर्यटन विभाग के अनुसार, इन वेलनेस सेंटरों का उद्देश्य राज्य आने वाले पर्यटकों को हेल्थ टूरिज़्म की नई सुविधा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इन सेंटरों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और स्थानीय संसाधनों व प्राकृतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए इन्हें विकसित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि वेलनेस टूरिज़्म के बढ़ते रुझान को देखते हुए यह पहल न केवल पर्यटन को नई दिशा देगी बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। इनमें से कई वेलनेस सेंटर वर्ष 2026 तक संचालन में आ जाने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य को वेलनेस टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 10वें आयुर्वेद दिवस समारोह में आयुष विभाग और पर्यटन विभाग के बीच नया करार किया गया। इस समझौते के तहत प्रदेश में 12 नए आयुष वेलनेस केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि इन वेलनेस केंद्रों पर देश–विदेश से पर्यटक उपचार और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए आएंगे, जिससे प्रदेश के पर्यटन और स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
योजना के अनुसार—
उज्जैन और खजुराहो में 50-50 बिस्तरों वाले दो बड़े आयुष अस्पताल तैयार किए जाएंगे।
इसके अलावा 10 जिलों—पचमढ़ी, मंदसौर, आगर-मालवा, सागर, नर्मदापुरम, शहडोल, बालाघाट, मुरैना, झाबुआ और शुजालपुर—में 10-10 बिस्तरों वाले आयुष वेलनेस केंद्र स्थापित होंगे।
सरकार इन केंद्रों को उन पर्यटन स्थलों के पास विकसित कर रही है, जहां सबसे अधिक देशी और विदेशी पर्यटकों की आवाजाही रहती है। इस पहल से न केवल स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

एक ही छत के नीचे योग–ध्यान से लेकर आयुर्वेद–सिद्धा–यूनानी तक की सुविधाएँ, एमपी में वेलनेस टूरिज्म को मिल रहा नया आयाम
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई वेलनेस टूरिज्म पहल अब और मजबूत होती दिख रही है। प्रदेश में स्थापित किए जा रहे नए आयुष वेलनेस केंद्रों में एक ही छत के नीचे योग, ध्यान, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी चिकित्सा पद्धति जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य पर्यटकों को पारंपरिक और वैकल्पिक उपचार की सुविधाएँ एक साथ प्रदान करना है।
सरकार का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से उपजे तनाव और बीमारियों के बीच लोग प्राकृतिक व समग्र उपचार की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में ये वेलनेस केंद्र न सिर्फ स्वास्थ्य लाभ का माध्यम बनेंगे, बल्कि मध्य प्रदेश को वेलनेस टूरिज्म का नया हब बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
अधिकारियों का कहना है कि प्रयास यह है कि पर्यटन स्थलों पर आने वाले देशी–विदेशी पर्यटक सिर्फ घूमने ही नहीं, बल्कि आयुष चिकित्सा और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के लाभ उठाने भी आएँ। बताया गया कि केरल ने इसी मॉडल पर दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई, और मध्य प्रदेश भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
सरकार का विश्वास है कि इन केंद्रों से प्रदेश के पर्यटन, स्वास्थ्य और स्थानीय रोजगार—तीनों क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।

आयुष चिकित्सकों को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री ने डीएसीपी लागू करने की घोषणा, 2698 अधिकारियों को मिलेगा लाभ
मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डीएसीपी (डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि अब आयुष विभाग के सभी चिकित्सा अधिकारियों को वरिष्ठ पदनाम देकर प्रथम श्रेणी का दर्जा प्रदान किया जाएगा।
डीएसीपी व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को उनके अनुभव और सेवा वर्षों के आधार पर निश्चित समय पर वेतन वृद्धि और पदोन्नति मिलेगी। इस निर्णय से कुल 2698 आयुष अधिकारियों को लाभ पहुंचेगा, जिनमें
1453 आयुष चिकित्सा अधिकारी,
228 होम्योपैथी चिकित्सक, और
85 यूनानी चिकित्सक शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने से चिकित्सकों के वेतन में 50 हजार से 65 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस फैसले से आयुष क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा, और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सभी आयुर्वेद कॉलेजों में शुरू होगी पीजी की पढ़ाई, स्टाइपेंड में भी बढ़ोतरी; आयुष क्षेत्र में कई नई पहलें शुरू
मध्य प्रदेश सरकार ने आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक के बाद एक बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सभी आयुर्वेद कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। फिलहाल प्रदेश के सात सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों में से केवल चार में ही पीजी की पढ़ाई होती है, लेकिन अब यह सुविधा हर कॉलेज में उपलब्ध होगी।
इसके साथ ही पीजी कर चुके मेडिकल अफसरों के स्टाइपेंड में तीन वेतनमान की वृद्धि की भी घोषणा की गई है, जिससे आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
समारोह में हुई ये प्रमुख शुरुआतें
1. कारुण्य कार्यक्रम की शुरुआत
समारोह में कारुण्य कार्यक्रम लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य कैंसर, पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों में आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार करना है।
2. आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रम का विस्तार
आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रम को राज्य के 55 जिलों तक विस्तार देने की औपचारिक घोषणा की गई, जिससे अधिक नागरिकों को आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होंगी।
3. औषधीय पौधों की खेती के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन
उद्यान और आयुष विभाग ने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने हेतु टोल-फ्री हेल्पलाइन 155258 शुरू की। यह हेल्पलाइन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
इस पर किसानों और इच्छुक लोगों को—
उनके क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त औषधीय पौधों की जानकारी,
वैज्ञानिक तकनीक,
जैविक पद्धतियाँ,
और संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश में आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सा सुविधाओं और औषधीय कृषि—चारों क्षेत्रों को गति मिलेगी, जिससे प्रदेश आयुष सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।




