मध्यप्रदेश में पर्यटन को नई ऊँचाईयाँ: खजुराहो का कला और आस्था का अद्भुत संगम
खजुराहो
मध्यप्रदेश सरकार राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो का प्राचीन और भव्य
दुलादेव मंदिर
पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है।
कला और आस्था का संगम
चंदेल राजवंश द्वारा लगभग 12वीं शताब्दी में निर्मित, दुलादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित खजुराहो के अंतिम मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला शैली और उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए जाना जाता है, जिसमें दीवारों और छतों पर जटिल नक्काशीदार आकृतियाँ, विशेषकर अप्सराओं (स्वर्गीय अप्सराओं) की मूर्तियाँ, आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
सरकार के प्रोत्साहन के प्रयास
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में खजुराहो में कैबिनेट बैठकें आयोजित कर इस क्षेत्र के विकास के प्रति विशेष रुचि दिखाई है। सरकार की पहलकदमी में:
- पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- खजुराहो में ‘द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस’ (The Oberoi Rajgarh Palace) जैसी विश्व स्तरीय सुविधाओं का उद्घाटन किया गया है, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
- पन्ना टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए नई आरामदायक बसों की शुरुआत जैसी पहल भी की गई है, जिससे पर्यटक खजुराहो के आसपास के प्राकृतिक और वन्यजीव आकर्षणों का भी आनंद ले सकें।
ये प्रयास दर्शाते हैं कि राज्य सरकार खजुराहो को न केवल एक ऐतिहासिक स्थल, बल्कि एक विश्व स्तरीय पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन पहलों के कारण, पिछले वर्षों की तुलना में खजुराहो में आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या में notable वृद्धि देखी गई है।
दुलादेव मंदिर का पुनरुत्थान राज्य की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।



