गुजरात।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं और इसी क्रम में उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) के अवसर पर सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी शौर्य यात्रा में शामिल हुए और इसके बाद मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं और उपस्थित जनसभा को संबोधित किया।
इतिहास में दफन हुए हमलावर, सोमनाथ आज भी खड़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि करीब 1000 साल पहले विदेशी आक्रांताओं को लगा कि उन्होंने जीत हासिल कर ली, लेकिन गजनी से लेकर औरंगजेब तक जो भी हमलावर थे, इतिहास में दफन हो गए। वहीं सोमनाथ पर भगवा ध्वज आज भी शान से लहरा रहा है, जो देश की अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है।
वीरों के बलिदान और मंदिर पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक योगदान
पीएम मोदी ने अपने भाषण में विदेशी आक्रांताओं के हमलों और उनके विरुद्ध संघर्ष करने वाले वीरों के बलिदान का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखने और इसे आधुनिक स्वरूप देने के ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की स्वाभिमान और शक्ति का प्रतीक है, जिसे सदियों से वीरों और राष्ट्रभक्तों ने सुरक्षित रखा।
सोमनाथ में पूजा और जनसभा
शौर्य यात्रा में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और जनता को संबोधित किया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता, वीरों के बलिदान और देश के स्वाभिमान पर जोर दिया।
सोमनाथ मंदिर में पीएम मोदी की उपस्थिति ने न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में भी महत्व रखता है।
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि दुर्भाग्य से आज भी देश में वे ताकतें मौजूद हैं जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली थी, तब भी उन्हें इसे रोकने की कोशिशें की गई थीं।
पीएम मोदी ने कहा कि हमें सावधान और एकजुट रहना है और उन ताकतों से सतर्क रहना है, जो देश और समाज को बांटने की कोशिश में लगी हुई हैं। उनका संदेश था कि सोमनाथ मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश के स्वाभिमान और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भावपूर्ण संदेश
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गर्व, गरिमा, गौरव और अध्यात्म की अनुभूति है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में 72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार, 1000 ड्रोन के माध्यम से वैदिक गुरुकुलों के विद्यार्थियों की भागीदारी, सोमनाथ के 1000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन, और 108 अश्वों के साथ शौर्य यात्रा जैसी गतिविधियां शामिल थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, इसे केवल समय ही संकलित कर सकता है।
गजनी और औरंगजेब के हमलों के बावजूद सोमनाथ आज भी खड़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ में ‘सोम’ अर्थात् अमृत और शिव की चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है। उन्होंने कहा कि गजनी और औरंगजेब जैसे हमलावर इतिहास के पन्नों में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर के तट पर अडिग खड़ा है।
कट्टरपंथ और तुष्टिकरण के खिलाफ चेतावनी
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद कुछ लोग गुलामी की मानसिकता के साथ सोमनाथ जैसे पुण्य स्थलों से पल्ला झाड़ने का प्रयास करते रहे, और तुष्टिकरण के ठेकेदार कट्टरपंथ के आगे झुके। उन्होंने याद दिलाया कि 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तब भी विरोध हुआ, और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आने पर भी आपत्ति जताई गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभा में उपस्थित लोगों को सावधान और एकजुट रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि हमें हमेशा ऐसी ताकतों से सतर्क रहना चाहिए, जो देश और समाज को बांटने का प्रयास करती हैं।