मध्यप्रदेश बना देश का पहला राज्य जिसने टेक्नोलॉजी-एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की
भोपाल, मध्यप्रदेश — देश में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, मध्यप्रदेश सरकार ने टेक्नोलॉजी-एग्नोस्टिक (प्रौद्योगिकी-स्वतंत्र) रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी को लागू कर, यह गौरव प्राप्त किया है कि वह पहला राज्य बन गया है जिसने ऐसी नीति अपनाई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा करते हुए कहा कि यह नीति निवेशकों को अधिक लचीलापन और अनुकूल अवसर प्रदान करती है, चाहे वे सौर (सोलर) हो, पवन (विंड) हो, या हाइब्रिड प्रोजेक्ट हों।
नयी मध्यप्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
नीति की अवधि 5 साल है।
- राज्य ने लक्ष्य रखा है कि वह 2030 तक अपनी वार्षिक बिजली खपत का 50% अक्षय स्रोतों (renewables) से प्राप्त करे।
- इसके अलावा, पॉलिसी में 500 kW से ऊपर की मोठे अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है (केन्द्रीयकृत प्रणालियाँ), जबकि डिसेंट्रलाइज्ड सिस्टमों को इससे बाहर रखा गया है।
- डेवलपर्स को कई लाभ दिए गए हैं — जैसे 10 साल के लिए बिजली शुल्क में छूट, सरकारी भूमि पर सर्कल रेट का 50% रीइंबर्समेंट, और स्टैम्प ड्यूटी में छूट।
- ऊर्जा स्टोरेज (बैटरियों जैसे) प्रोजेक्ट्स को भी विशेष प्रोत्साहन मिले हैं — जैसे पंजीकरण शुल्क में छूट, बिजली ड्यूटी की छूट, आदि।
- पॉलिसी के अंतर्गत “ग्रीन सिटी” और “ग्रीन ज़ोन” विकसित करने की योजना है — जैसे वे शहर जो अपनी ऊर्जा का कम-से-कम 30 % अक्षय स्रोतों से पूरा करें, उन्हें “ग्रीन सिटी” का दर्जा मिलेगा।
राजनीतिक और आर्थिक महत्त्व
मध्यप्रदेश का यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम है, बल्कि यह निवेशकों को भी आकर्षित करता है।
- इसके चलते, राज्य को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
- नीति से न सिर्फ उत्पादन प्रोत्साहित होगा, बल्कि ऊर्जा उपकरण निर्माण (manufacturing) में भी राज्य को बढ़त मिलने की संभावना है।
- इसके अलावा, मध्यप्रदेश में “नेट-जीरो कार्बन” सिद्धांत पर आधारित पहला सोलर शहर सांची विकसित किया जा रहा है।
उपलब्धि – रिन्यूएबल एनर्जी के दाम में गिरावट
मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है — मोरना में सौर + स्टोरेज (बैटरियों) आधारित प्रोजेक्ट के लिए ₹ 2.70 प्रति यूनिट का रिकॉर्ड-कम टैरीफ़ तय किया गया है।
- यह परियोजना सालाना 95% उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जो ऊर्जा की विश्वसनीयता बढ़ाता है।
इस नीति के माध्यम से मध्यप्रदेश ने यह दिखाया है कि अक्षय ऊर्जा को सिर्फ उत्पादन के रूप में नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी न्युट्रल दृष्टिकोण (जहां डेवलपर्स अपनी पसंद की तकनीक चुन सकें) से अपनाया जा सकता है।
इससे निवेशकों को सुविधा होगी, और वे सौर, पवन, हाइब्रिड या स्टोरेज-समर्थित प्रोजेक्ट्स को अपने दृष्टिकोण और व्यावसायिक मॉडल के मुताबिक बना सकेंगे।
लंबे समय में, यह नीति राज्य को ग्रीन बिजली निर्यातक बनने में मदद कर सकती है, खासकर क्योंकि मध्यप्रदेश में बड़ी अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य हैं।
साथ ही, इससे रोजगार सृजन (नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण, सौर पार्क आदि) में तेजी आने की संभावना है।



