नई दिल्ली। जस्टिस सूर्यकांत ने आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई।
जस्टिस सूर्यकांत का CJI के रूप में 15 महीनों का कार्यकाल होगा। वे सेवानिवृत्त हो रहे CJI भूषण आर. गवई के उत्तराधिकारी बने हैं। शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, वरिष्ठ न्यायाधीशों और अन्य गणमान्य अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज की।
नए CJI के कार्यभार संभालने के साथ ही न्यायपालिका में कई महत्वपूर्ण मामलों और न्यायिक सुधारों को लेकर नई उम्मीदें जागी हैं। जस्टिस सूर्यकांत अपनी साफ-सुथरी छवि, संतुलित दृष्टिकोण और महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अनुशंसा को मंजूरी देते हुए जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां मुख्य न्यायाधीश (CJI) नियुक्त कर दिया।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आज जस्टिस सूर्यकांत ने औपचारिक रूप से पद की शपथ ग्रहण कर ली। इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर कार्यभार संभाल लिया है। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीनों का होगा।
नए CJI के चयन और नियुक्ति की यह प्रक्रिया भारत के सर्वोच्च न्यायालय में परंपरागत वरिष्ठता क्रम के अनुसार पूरी की गई।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल समेत कई वरिष्ठ मंत्री और गणमान्य हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर 2025 को औपचारिक रूप से CJI नियुक्त किया गया था। वे यह महत्वपूर्ण दायित्व 9 फरवरी 2027 तक निभाएँगे। इस दौरान उनसे न्यायपालिका में पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों के निपटारे को लेकर अहम भूमिका निभाने की अपेक्षा है।
देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने आज अपना कार्यभार संभाल लिया। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की स्थापित परंपरा के अनुसार हुई है, जिसके तहत सेवानिवृत्त हो रहे CJI भूषण आर. गवई ने वरिष्ठतम न्यायाधीश को अपना उत्तराधिकारी चुना।
CJI गवई 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद संवैधानिक रूप से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पद छोड़ने से पहले उन्होंने अनुच्छेद 124(2) के तहत जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी देते हुए उन्हें देश का नया CJI नियुक्त किया।
शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत का एक भावुक क्षण भी देखने को मिला, जब उन्होंने मंच से उतरकर अपने भाई और बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य, न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत अपने न्यायिक करियर में कई महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न संवैधानिक बेंचों में शामिल रहते हुए उन्होंने अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण, बिहार में SIR मामले पर सुनवाई, और 65 लाख मतदाताओं की सूची जारी करने का आदेश जैसे कई प्रमुख मामलों में अहम भूमिका निभाई।
जस्टिस सूर्यकांत की छवि एक स्पष्ट, सख्त और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित फैसले देने वाले न्यायाधीश की रही है।
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में वे हरियाणा से आने वाले पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। न्यायपालिका में लंबे सफर के दौरान वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं।
CJI सूर्यकांत से न्यायिक सुधार, पारदर्शिता और संवैधानिक मामलों में निर्णायक नेतृत्व की उम्मीद की जा रही है।




