मध्य प्रदेश की बेटी ने फिर रचा इतिहास: बैतूल की महिला क्रिकेटर ने ब्लाइंड वर्ल्ड कप में चमकाया देश का नाम
आज के दौर में बेटियां किसी भी क्षेत्र में खुद को साबित करने में पीछे नहीं हैं। हर सुबह देशभर से महिलाओं की उपलब्धियों की नई कहानियाँ हमें प्रेरणा देती हैं। ताज़ा उदाहरण है भारतीय महिला क्रिकेट टीम, जिसने हाल ही में आईसीसी विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। इसी कड़ी में पहले T20 ब्लाइंड महिला वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने नेपाल को हराकर खिताब अपने नाम किया।
- मध्य प्रदेश की बेटी ने फिर रचा इतिहास: बैतूल की महिला क्रिकेटर ने ब्लाइंड वर्ल्ड कप में चमकाया देश का नाम
- चुनौतियों पर भारी दुर्गा: बैतूल की बेटी ने ब्लाइंड वर्ल्ड कप में गाड़ा जीत का झंडा
- ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भारत की धमाकेदार जीत, बैतूल की दुर्गा ने बढ़ाया प्रदेश का मान
- 50% ब्लाइंडनेस के बावजूद दमदार सफर: दुर्गा ने संघर्षों को बनाया ताकत
- टी-20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप: सात देशों की भिड़ंत में भारत का जलवा
- हौसला और मेहनत—दुर्गा की सबसे बड़ी ताकत
- इंदौर से मिली उड़ान: दुर्गा के सपनों को संस्था ने दी ताकत
- पहले भी चमका है मध्य प्रदेश का नाम: क्रांति गौड़ को मिला 1 करोड़ का सम्मान
- कैसे खेलते हैं ब्लाइंड पर्सन क्रिकेट? यहाँ जानें नियम और तरीका
इस ऐतिहासिक जीत के बीच मध्य प्रदेश के बैतूल की बेटी ने भी पूरे देश का मान बढ़ाया है। कठिन आर्थिक परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों से लड़ते हुए इस खिलाड़ी ने अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया। दृढ़ इरादों और निरंतर मेहनत के बल पर वह वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा बनी और भारत की जीत में अहम योगदान दिया।
क्रांति गौड़ के बाद मध्य प्रदेश की यह खिलाड़ी एक और मिसाल बनकर उभरी है। उसने न सिर्फ अपने परिवार और गांव, बल्कि पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।
चुनौतियों पर भारी दुर्गा: बैतूल की बेटी ने ब्लाइंड वर्ल्ड कप में गाड़ा जीत का झंडा
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कहते हैं कि व्यक्ति के नाम का उसके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, और बैतूल की दुर्गा येवले (यादव) ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। पहले टी-20 ब्लाइंड महिला वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दुर्गा ने टीम इंडिया की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी बदौलत भारत ने श्रीलंका के कोलंबो में खेले गए फाइनल में जीत का परचम लहराया।
भारत और नेपाल के बीच हुए खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम ने 7 विकेट से शानदार जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक विजय के साथ दुर्गा येवले विश्व विजेता टीम का हिस्सा बनीं और अपने नाम के अनुरूप सभी चुनौतियों पर विजय पा ली।
गरीबी, सामाजिक बाधाओं और सीमित संसाधनों के बावजूद दुर्गा ने हार नहीं मानी। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत से उन्होंने न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। कोलंबो के मैदान में गूंजी उनकी सफलता की कहानी अब बैतूल ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश की प्रेरणा बन चुकी है।
ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भारत की धमाकेदार जीत, बैतूल की दुर्गा ने बढ़ाया प्रदेश का मान
पहले ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने नेपाल को मात देकर शानदार जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक सफर में मध्य प्रदेश की दुर्गा येवले का प्रदर्शन खासा प्रभावशाली रहा। गेंद और बल्ले दोनों से उनके आत्मविश्वास भरे खेल ने टीम को मज़बूत बढ़त दिलाई।
नेपाल की टीम को भारत ने पहले बल्लेबाजी करने पर 5 विकेट के नुकसान पर 114 रनों पर रोक दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 12 ओवर में ही 117 रन बनाकर मुकाबले को 7 विकेट से अपने नाम किया। जीत के साथ ही देशभर में जश्न का माहौल है, वहीं मध्य प्रदेश, बैतूल और इंदौर स्थित महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।
दुर्गा के सराहनीय प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जज़्बा और मेहनत हो तो कोई चुनौती बड़ी नहीं होती।

50% ब्लाइंडनेस के बावजूद दमदार सफर: दुर्गा ने संघर्षों को बनाया ताकत
दुर्गा येवले का क्रिकेट सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास का अद्भुत उदाहरण है। बैतूल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली दुर्गा ने शुरुआत से ही अपने खेल के दम पर खुद को साबित किया है।
नवंबर 2022 में आयोजित ब्लाइंड क्रिकेट प्रतियोगिता ने उनके करियर की दिशा बदल दी। इसी दौरान कैंप में क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन एमपी के अध्यक्ष सोनू गोलकर की नजर दुर्गा की प्रतिभा पर पड़ी। उनकी क्षमता को पहचानते हुए उन्हें जिला स्तरीय टीम में मौका दिया गया। दुर्गा के शानदार प्रदर्शन ने जल्द ही उन्हें प्रदेश स्तरीय टीम तक पहुंचा दिया।
इसके बाद उनका सफर लगातार आगे बढ़ता गया—
2023 में बेंगलुरु,
2024 में हुबली,
2025 में केरल में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दुर्गा ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया।
इन्हीं उपलब्धियों ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचाया और वह टी-20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप के लिए चयनित हुईं, जहां उन्होंने देश को गौरवान्वित किया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि दुर्गा को 50 प्रतिशत ब्लाइंडनेस है और इसी कारण वे बी-3 कैटेगरी में खेलती हैं। लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने इस चुनौती को अपनी ताकत में बदल दिया।
टी-20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप: सात देशों की भिड़ंत में भारत का जलवा
11 नवंबर से 25 नवंबर तक आयोजित टी-20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, इंग्लैंड, अमेरिका और श्रीलंका सहित कुल 7 देशों की टीमें आमने-सामने थीं। भारत और श्रीलंका ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की सह-मेजबानी की। कड़े मुकाबलों से भरे इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।
हौसला और मेहनत—दुर्गा की सबसे बड़ी ताकत
भारत की इस जीत में बैतूल की दुर्गा येवले का योगदान विशेष रहा। उनकी उपलब्धि से परिवार और गांव में खुशी की लहर है। दुर्गा के कोच बताते हैं कि वह अभ्यास में बेहद अनुशासित और फोकस्ड रहती हैं। ब्लाइंड क्रिकेट में गेंद में लगे घुंघरू की आवाज पर ध्यान केंद्रित कर शॉट लगाना एक चुनौती होता है, लेकिन दुर्गा इसे भी अपनी ताकत बना चुकी हैं।
परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि मेहनत और हौसला किसी भी इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। दुर्गा की सफलता भी इसका जीता-जागता उदाहरण है।
अपनी उपलब्धि पर दुर्गा का कहना है कि क्रिकेट हमेशा से उनका शौक रहा है। गांव में सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन इंदौर के छात्रावास और क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की मदद से उन्हें अपने सपने को नई उड़ान देने का अवसर मिला है। दुर्गा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए और अधिक मेहनत करने के लिए तैयार हैं।

इंदौर से मिली उड़ान: दुर्गा के सपनों को संस्था ने दी ताकत
इंदौर ने बैतूल की बेटी दुर्गा येवले के क्रिकेट करियर को नई दिशा दी है। महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. डॉली जोशी के अनुसार, दुर्गा ने प्रथम टी-20 ब्लाइंड महिला वर्ल्ड कप 2025 में टीम इंडिया का हिस्सा बनकर शानदार प्रदर्शन किया और पूरे टूर्नामेंट में भारत को विश्व चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉली जोशी ने बताया कि दुर्गा मूल रूप से बैतूल की रहने वाली हैं और वर्तमान में संस्था में रहकर पीजी कोर्स कर रही हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि केवल दुर्गा ही नहीं, बल्कि संस्था की कई छात्राओं ने विभिन्न दृष्टिहीन क्रिकेट प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर अपना नाम रोशन किया है। संस्था में इन बालिकाओं को खेलों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसका प्रमाण दुर्गा की सफलता से मिलता है।
उन्होंने यह भी बताया कि दुर्गा फिलहाल कोलंबो से टीम के साथ भारत लौट आई हैं और जल्द ही इंदौर पहुंचेगी, जहां संस्था द्वारा उनका सम्मान किया जाएगा।
पहले भी चमका है मध्य प्रदेश का नाम: क्रांति गौड़ को मिला 1 करोड़ का सम्मान
जनजातीय गौरव दिवस पर मध्य प्रदेश की बेटियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने की कड़ी में, हाल ही में क्रिकेटर क्रांति गौड़ को मोहन सरकार ने 1 करोड़ रुपये का चेक सौंपकर पुरस्कृत किया। जबलपुर में आयोजित बिरसा मुंडा उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए थे। लगातार बल्लेबाज बेटियां प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं।
कैसे खेलते हैं ब्लाइंड पर्सन क्रिकेट? यहाँ जानें नियम और तरीका
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि दृष्टिहीन खिलाड़ी क्रिकेट कैसे खेल सकते हैं। ब्लाइंड क्रिकेट में एक विशेष सफेद प्लास्टिक की गेंद का उपयोग किया जाता है, जिसके अंदर बॉल बेयरिंग भरी होती हैं। गेंद फेंके जाने पर उससे तेज आवाज आती है, जिसे खिलाड़ी सुनकर दिशा का अंदाज़ा लगाते हैं।
गेंद डालने से पहले गेंदबाज बल्लेबाज से पूछता है: “तैयार?”
गेंद फेंकते समय गेंदबाज को ऊँची आवाज में “प्ले!” बोलना अनिवार्य होता है।
टीम में कुल 11 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें कम से कम 4 खिलाड़ी पूरी तरह से ब्लाइंड (B1 कैटेगरी) होते हैं।
बाकी खिलाड़ी आंशिक दृष्टिबाधित — बी2 और बी3 श्रेणी में होते हैं।
ब्लाइंड क्रिकेट में ध्वनि, अनुमान, अभ्यास और अद्भुत एकाग्रता खेल का आधार है।




