भोपाल संवाददाता : रोशनी बिसेन
Bakrid 2026 : देशभर में आज त्याग, समर्पण और कुर्बानी का पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) पूरे धार्मिक उत्साह और अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में शामिल बकरीद का पर्व इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम महीने जिलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करेंगे तथा देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगेंगे।
ईद-उल-अजहा का पर्व पैगंबर हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान की याद में मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपने बेटे की कुर्बानी देने का आदेश दिया था। हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए तैयार हो गए। उनकी इस निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली। तभी से ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी देने की परंपरा चली आ रही है।
कश्मीर के कुछ हिस्सों में एक दिन पहले मनाएंगे ईद
दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम ने पुष्टि की है कि भारत में बकरीद 28 मई को मनाई जाएगी। हालांकि, कश्मीर के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर चांद दिखाई देने की पुष्टि होने के बाद 27 मई को ही ईद मनाई गई। देशभर की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रखी गई है।
Bakrid 2026 : बकरीद क्यों मनाई जाती है
बकरीद के दिन नमाज अदा करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग कुर्बानी की रस्म निभाते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तथा तीसरा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए रखा जाता है। इस परंपरा का उद्देश्य समाज में भाईचारा, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता की भावना को मजबूत करना है।
Bakrid 2026 : कुर्बानी की परंपरा
ईद-उल-अजहा का पर्व केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह इंसानियत, त्याग, करुणा और सामाजिक समानता का संदेश भी देता है। बकरीद के मौके पर लोग एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और प्रेम व सौहार्द का संदेश फैलाते हैं। पूरे देश में त्योहार को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है।



