भोपाल। हेमंत कटारे ने मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के सम्मेलन में फ्रीबीज योजनाओं पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में “फ्री की रेवड़ी” बंद होनी चाहिए, क्योंकि इससे विकसित भारत के लक्ष्य को नुकसान पहुंचता है।
कटारे ने कहा कि जनप्रतिनिधि अक्सर लोगों की नाराजगी के डर से कड़े फैसले नहीं ले पाते, लेकिन अगर इसी डर में रहेंगे तो देश की सेवा कैसे करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं के खातों में पैसे डालने से क्या वे सच में सशक्त हो रही हैं? उनके अनुसार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की बजाय उनकी क्षमता को विकसित करना ज्यादा जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पैसा खर्च करना ही है तो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में निवेश होना चाहिए। कटारे ने यह भी कहा कि बिना मेहनत के पैसा मिलने से लोगों में नवाचार और आविष्कार की भावना कमजोर पड़ सकती है।
ब्यूरोक्रेसी पर भी कटाक्ष करते हुए उन्होंने IAS और IPS अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। उनका कहना था कि जैसे जनप्रतिनिधियों का हर पांच साल में जनता मूल्यांकन करती है, वैसे ही अफसरों के कामकाज का भी आकलन होना चाहिए।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायक शामिल हुए, जहां लोकतंत्र, भविष्य की संभावनाओं और युवा नेतृत्व की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।



