भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
नई दिल्ली: देश आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहा है। 14 अगस्त 1947 को भारत के विभाजन के दौरान लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और अपनों को खोने की त्रासदी से गुजरना पड़ा था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लोगों और उस दौर में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि विभाजन का दौर ऐसा था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं। परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही।
‘लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर बनाई’
पीएम मोदी ने कहा कि इन मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से खड़ी की। उन्होंने चुनौतियों को अवसर और सफलता में बदला तथा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों की जीवन-यात्रा हमें मानवीय जज्बे और साहस की ताकत की याद दिलाती है। उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के संकल्प को और दृढ़ करे।
उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
दूसरी पोस्ट में दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य पोस्ट के जरिए भी विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने साहस और सामर्थ्य से नए संकल्पों को सिद्ध किया और देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।
पीएम मोदी ने देशवासियों से सद्भावना और राष्ट्रीय एकजुटता की भावना को और मजबूत करने की अपील की।
संस्कृत सुभाषित भी किया साझा
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया:
“उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”
इसका भावार्थ है कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विभिन्न कलाओं, विज्ञान, तकनीक, कौशल और नवाचार का विकास होता है तथा सफलता का रास्ता खुलता है। मनुष्य को केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री के संदेश में विभाजन की त्रासदी को याद करने के साथ-साथ उन लोगों के संघर्ष, साहस और राष्ट्र निर्माण में योगदान को भी रेखांकित किया गया।




