भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी स्थित कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव (CS), पुलिस महानिदेशक (DGP), वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही संबंधित दस्तावेज और रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
CM मोहन यादव ने दिए जांच के निर्देश
मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सचिव को जांच करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे को उठाया है, इसलिए पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। सरकार ने मामले के तथ्यों की पड़ताल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
शिवराज सिंह चौहान ने दिया था धरना
कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने रविवार को धरना देकर कार्रवाई पर नाराजगी जताई और प्रभावित परिवारों की समस्याएं उठाईं।
घरों के साथ फसलें और पानी के स्रोत को नुकसान पहुंचने का आरोप
शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ गए, फसलें नष्ट हुईं और पानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। उन्होंने मौके पर वरिष्ठ वन एवं प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
आयोग के नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब तीन दिन के भीतर अधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी नजरें टिकी हैं।



