भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर गुरुवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भांग, चंदन और आभूषणों से बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार की पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से भगवान का आकर्षक अलंकरण किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। सुबह की भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से उनके पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर ‘जय बाबा महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण बना रहा।




