भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागर पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और चांदनी रात में खीर रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होने का अनुमान है। वहीं, लक्ष्मी पूजा के लिए बताया गया निशीथ मुहूर्त रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे तक रहेगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
शरद पूर्णिमा पर करें ये 4 पारंपरिक उपाय
1. पीपल के पत्ते और चावल से जुड़ी परंपरा
शरद पूर्णिमा पर कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के स्वच्छ पत्ते पर चावल रखकर नजर उतारने की परंपरा प्रचलित है। बाद में इन चावलों को बहते जल में प्रवाहित किया जाता है। इसे नकारात्मकता और परेशानियों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। ध्यान रखें कि किसी भी उपाय को निश्चित परिणाम देने वाला न मानें और जल स्रोतों को प्रदूषित करने से बचें।
2. चांदनी में रखें खीर
शरद पूर्णिमा पर गाय के दूध और चावल से खीर बनाने की विशेष परंपरा है। रात में खीर को स्वच्छ स्थान पर जाली या ढक्कन से ढककर रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन शुभ माना जाता है। अगले दिन भगवान को भोग लगाने के बाद इसे परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। खीर को रातभर बाहर रखते समय स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखें।
3. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की करें पूजा
इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। पूजा में खीर, मखाने और सफेद मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। श्रद्धालु लक्ष्मी मंत्रों का जाप, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण भी करते हैं। मान्यता है कि कोजागर पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है।
4. पीली कौड़ियों से जुड़ा है धन-समृद्धि का उपाय
धार्मिक परंपराओं में शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के सामने पीली कौड़ियां रखकर पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की मान्यता है। इसे घर में बरकत और आर्थिक समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
शरद पूर्णिमा पर क्यों खास है चंद्रमा की पूजा?
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु चंद्रदेव को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। यह पर्व धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपराओं और चांदनी रात में सामूहिक रूप से उत्सव मनाने का अवसर भी है।




