भोपाल
“झीलों की नगरी” भोपाल के पर्यटन को आज एक नया आयाम मिला है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल के बोट क्लब पर 20 नई ‘शिकारा’ नावों का हरी झंडी दिखाकर औपचारिक शुभारंभ किया। इस परियोजना का उद्देश्य भोपाल की बड़ी झील (अपर लेक) को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील की तर्ज पर विकसित करना है।
पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर
शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “भोपाल के सबसे सुंदर बड़े तालाब पर शिकारा नावों के संचालन से यहां के पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। डल झील की तर्ज पर जब यहां शिकारे चलेंगे, तो पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव मिलेगा।” उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की इस सबसे खूबसूरत झील में ‘शिकारा’ के संचालन से भोपाल एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा, जिससे जल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।
फ्लोटिंग मार्केट और रेस्टोरेंट का भी उठाया लुत्फ
कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने स्वयं एक शिकारा नाव में सैर की। उन्होंने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट में रुककर चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता किया और जायका लिया। इसके अतिरिक्त, सीएम ने फ्लोटिंग बोट मार्केट से वस्त्रों की खरीदारी भी की, जो इस प्रोजेक्ट की एक और प्रमुख विशेषता है।
परियोजना की मुख्य बातें
- मध्य प्रदेश पर्यटन निगम द्वारा अपर लेक बोट क्लब में कुल 20 नए शिकारे शुरू किए गए हैं।
- यह प्रोजेक्ट भोपाल को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई विधायक और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
बर्ड-वॉचिंग के लिए दूरबीन की व्यवस्था
झीलों की नगरी प्रवासी पक्षियों का भी एक प्रमुख केंद्र है। इसी को ध्यान में रखते हुए, शिकारा राइड्स के दौरान पर्यटक अब बर्ड-वॉचिंग (पक्षी दर्शन) का भी लुत्फ उठा सकेंगे। इन विशेष नौकाओं में पक्षियों को करीब से देखने के लिए दूरबीनों की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए यह अनुभव और भी खास हो जाएगा।
फ्लोटिंग मार्केट में खरीदारी और स्थानीय व्यंजन
पर्यटकों के अनुभव को और समृद्ध बनाने के लिए, इन तैरते हुए “शिकारा” बाज़ारों में कई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं:
- स्थानीय उत्पाद: पर्यटक अन्य शिकारा में उपलब्ध ताज़ी ऑर्गेनिक सब्ज़ियां और फल खरीद सकेंगे।
- हस्तशिल्प: मध्यप्रदेश में निर्मित आकर्षक हस्तशिल्प के उत्पाद भी खरीदारी के लिए उपलब्ध होंगे।
- खान-पान: राइड के दौरान पर्यटक स्थानीय व्यंजनों और स्नैक्स का भी आनंद ले सकेंगे
पर्यावरण हितैषी निर्माण और आधुनिक तकनीक
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इन शिकारों का निर्माण है। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए विशेष रूप से सतर्कता बरती गई है।
- प्रदूषण रहित सामग्री: सभी 20 शिकारों का निर्माण ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ (FRP) और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से किया गया है।
- सुरक्षित और टिकाऊ: यह आधुनिक तकनीक सुनिश्चित करती है कि जल के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का रासायनिक प्रदूषण न हो, जिससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी।
- अंतरराष्ट्रीय मानक: इन शिकारों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा किया गया है, जिनके उत्पाद केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा काफी पसंद किए जा रहे हैं।
वाटर-टूरिज्म हब बनेगा भोपाल
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MP Tourism Development Corporation) इन शिकारों का संचालन करेगा। निगम का मुख्य उद्देश्य भोपाल में पर्यटकों को एक सुरक्षित, टिकाऊ और आकर्षक जल-पर्यटन का अनुभव प्रदान करना है। राजधानी भोपाल अब एक प्रमुख ‘वाटर-टूरिज्म हब’ के रूप में विकसित होने की ओर अग्रसर है।
किराया और समय सारिणी
पर्यटकों की सुविधा के लिए इनका किराया भी निर्धारित कर दिया गया है:
- क्षमता: प्रत्येक शिकारे में 4 से 6 लोग बैठ सकते हैं।
- किराया: आधे घंटे की सैर के लिए पर्यटकों को ₹300 से ₹450 चुकाने होंगे।
- समय: ये शिकारे सुबह 9 बजे से सूर्यास्त (सनसेट) तक उपलब्ध रहेंगे।
- अन्य सुविधा: सैर के दौरान, नाविक पर्यटकों को बड़े तालाब और भोपाल की समृद्ध विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी देंगे।
आज से, भोपाल का बोट क्लब इन आधुनिक और आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।



