इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से अब तक 32 लोगों की मौत के मामले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस गंभीर संकट पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत बुधवार को इंदौर पहुंचीं और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि एक आम नागरिक सरकार से सिर्फ स्वच्छ पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की अपेक्षा करता है, लेकिन भाजपा सरकार इन मूलभूत जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने इंदौर को आठ बार स्वच्छता में नंबर वन घोषित किए जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि स्वच्छता का ढोल पीटने वाले नेता उसी शहर में दूषित पानी से हुई 32 मौतों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन अब तक न कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि जवाबदेह ठहराया गया है।
कांग्रेस नेत्री ने इस मामले में तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने भागीरथपुरा क्षेत्र के विधायक का तत्काल इस्तीफा लेने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और प्रत्येक मृतक परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब तक भागीरथपुरा क्यों नहीं पहुंचे। साथ ही इंदौर सांसद शंकर लालवानी द्वारा पीड़ित परिवारों से मुलाकात न करने और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मृतक परिवारों के परिजनों को राहुल गांधी से मिलने का प्रयास करने पर प्रताड़ित किया जा रहा है, जो भाजपा सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाएगी।
सुप्रिया श्रीनेत ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को एक संगठित अभियान के रूप में चलाएगी और जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता तथा सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक पार्टी इस विषय को लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के दावों के पीछे छिपी हकीकत अब सामने आ चुकी है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि एक आम नागरिक सरकार से केवल स्वच्छ पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की अपेक्षा करता है, लेकिन इंदौर जैसे शहर में दूषित पानी से दर्जनों मौतें होना प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है।
कांग्रेस नेत्री ने भागीरथपुरा क्षेत्र के विधायक का इस्तीफा, दोषी अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज करने और प्रत्येक मृतक परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई।
इसके साथ ही सुप्रिया श्रीनेत ने ट्रेड यूनियनों से जुड़े मुद्दों, संसद में राहुल गांधी के बयानों को लेकर की गई कार्यवाही और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगातार प्रहार किया जा रहा है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस गंभीर मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी सड़क से संसद तक आंदोलन तेज करेगी।



