भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महोत्सव ने उज्जैन की सुंदरता को स्वर्ग के समान बना दिया है। आज की उज्जैन नगरी महाकवि कालिदास की रचनाओं में वर्णित अवंतिका के स्वरूप को साकार करती प्रतीत हो रही है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज के काल से अवंतिका नगरी न्याय, सुशासन और प्रशासनिक दक्षता की प्रतीक रही है। इन महान विभूतियों और उनकी प्रेरक गाथाओं को श्री महाकाल महालोक में मूर्ति कला और भित्ति चित्रों के माध्यम से अत्यंत सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल की नगरी स्वयं काल की नगरी है। बाबा महाकाल की कृपा से ही जीवन की प्रत्येक सांस है और यही प्रेरणा मानव सेवा के लिए समर्पित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर एक नई पहचान बनाई है। श्री महाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को अध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है, जिससे श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल का आशीर्वाद और उज्जैन की गौरवशाली विरासत की जानकारी प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने मकर संक्रांति की पावन संध्या पर पूजन-अर्चन कर श्री महाकाल महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्थित दोनों ज्योतिर्लिंगों की कनेक्टिविटी सड़क, रेल और वायु मार्ग से सुदृढ़ की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उज्जैन में शक्ति पीठ माता गढ़ कालिका के साथ-साथ शिप्रा नदी के तट पर स्थित गुरुद्वारा भी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां श्री गुरु नानक देव जी का आगमन हुआ था। उज्जैन की यह विविधता और समरसता इसे विशिष्ट बनाती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सावन महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी। अब शिवरात्रि से लेकर गुड़ी पड़वा तक विभिन्न मेलों और उत्सवों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से पर्यटकों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि उज्जैन और ग्वालियर में आयोजित व्यापार मेलों में वाहनों पर कर में छूट दी जा रही है। इसी कड़ी में अब भोपाल के साथ-साथ उज्जैन में भी दशहरा मैदान पर 5 दिवसीय वन मेला आयोजित किया जाएगा, जहां नागरिक विभिन्न वन उत्पाद प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने संगीत की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डमरू विश्व का पहला वाद्य यंत्र है और इसी से संगीत की समृद्ध परंपरा का आरंभ हुआ। उन्होंने कहा कि शंकर महादेवन द्वारा डमरू वाद्य यंत्र पर दी गई प्रस्तुति अद्भुत और अविस्मरणीय होती है। मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले को इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, हरिफाटक पुल सिक्स लेन, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सहित अन्य विकास कार्यों की सौगात देने की घोषणा भी की। साथ ही 25 जनवरी को उज्जैन में राहगीरी आनंद उत्सव आयोजित किए जाने की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री महाकालेश्वर मंदिर की नवीन आधिकारिक वेबसाइट पोर्टल www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले श्री महाकालेश्वर भक्त निवास के दानदाताओं के लिए विशेष वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/bhaktniwas का भी लोकार्पण किया गया।
श्री महाकाल महोत्सव में पार्श्व गायक शंकर महादेवन की भव्य और आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वीर भारत न्यास, विक्रमादित्य शोध पीठ एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव 18 जनवरी 2026 (विक्रम संवत 2082) तक चलेगा।



