Mohan Yadav का ‘ज्ञानी बजट’ 2026-27: राजधर्म, विकास और समृद्ध मध्यप्रदेश का रोडमैप
“प्रजासुखे सुखम् राज्ञः, प्रजानाम् च हितम् हितम्”— Arthashastra का यह राजधर्म सूत्र वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की मूल भावना बनकर उभरा है। प्रजा के सुख को सर्वोपरि मानने की इसी अवधारणा को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने इस वर्ष का बजट प्रस्तुत किया है, जो केवल आय-व्यय का विवरण नहीं बल्कि एक व्यापक विकास-दर्शन का दस्तावेज प्रतीत होता है।
मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में प्रस्तुत इस बजट ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘GYAN’—गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी—के विजन को आगे बढ़ाते हुए ‘I’ for Infrastructure और ‘I’ for Industry जोड़कर ‘GYANII’ मॉडल का स्वरूप दिया है। यह बदलाव प्रतीकात्मक भर नहीं, बल्कि विकास की बहुआयामी रणनीति का संकेत है।
GYANII: विकास के छह स्तंभ
G – गरीब कल्याण:
सामाजिक सुरक्षा पेंशन, संबल योजना, आवास और खाद्यान्न सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) को बजट प्रक्रिया से जोड़ना एक अभिनव पहल है। अब गरीबी का आकलन केवल आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 संकेतकों से होगा।
Y – युवा शक्ति:
15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की 28% आबादी के साथ मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे युवा राज्य है। कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक निवेश और श्रम कल्याण के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान युवाओं के लिए नए अवसरों का संकेत देता है।
A – अन्नदाता:
वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित करते हुए कृषि क्षेत्र के लिए लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सिंचाई, भंडारण, फसल सुरक्षा और कृषि प्रसंस्करण पर बल देकर “हर उपज को दाम” के संकल्प को सशक्त किया गया है।
N – नारी शक्ति:
लाड़ली बहना योजना, स्वरोजगार योजनाएँ और महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
I – Infrastructure:
पूंजीगत व्यय को GSDP का 4.80% अनुमानित किया गया है तथा अधोसंरचना में 30% वृद्धि का प्रावधान है। सड़क, जल, विद्युत, डिजिटल नेटवर्क और शहरी विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
I – Industry:
निवेश-अनुकूल वातावरण, भूमि बैंक, लॉजिस्टिक्स और नई औद्योगिक नीतियों के माध्यम से औद्योगिकीकरण को गति देने का प्रयास किया गया है। 2026-27 में राज्य का GSDP 18.48 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 10.69% वृद्धि को दर्शाता है।
रोलिंग बजट और वित्तीय अनुशासन
मध्यप्रदेश ने “रोलिंग बजट” की अवधारणा अपनाते हुए 2026-27 के साथ 2027-28 और 2028-29 की संभावित रूपरेखा भी प्रस्तुत की है। साथ ही “जीरो बेस्ड बजटिंग” के माध्यम से सभी योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को सुदृढ़ किया गया है। राजकोषीय घाटा GSDP के 3.87% के भीतर अनुमानित है, जो वैधानिक सीमा में है।
2047 का विजन
“समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” के दृष्टिपत्र के तहत 2047 तक राज्य का GSDP 2 ट्रिलियन डॉलर और प्रति व्यक्ति आय 22 लाख रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूंजी निवेश, औद्योगिक विकास और समावेशी नीतियों पर आधारित है।
निष्कर्ष
लाड़ली बहना, संबल, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक निवेश के वादों को बजटीय प्रावधानों से जोड़ते हुए सरकार ने “यथा वाचो तथा क्रिया” के मंत्र को दोहराया है।
अब वास्तविक परीक्षा क्रियान्वयन की है। आने वाला समय बताएगा कि यह “ज्ञानी बजट” केवल एक दस्तावेज है या वास्तव में समृद्ध और विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में बढ़ाया गया निर्णायक कदम।



