नई दिल्ली/गुजरात। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 12 जनवरी तक तीन दिन के गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे सोमनाथ, राजकोट, अहमदाबाद और गांधीनगर में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा धार्मिक, विकासात्मक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे की शुरुआत 10 जनवरी की शाम सोमनाथ से होगी। प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर पहुंचकर सबसे पहले सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद रात करीब 8 बजे वे ओंकार मंत्र जाप में शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर परिसर में आयोजित भव्य ड्रोन शो भी देखेंगे।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री जहां एक ओर धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे, वहीं दूसरी ओर वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन, राजकोट ट्रेड शो, अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे चरण का उद्घाटन और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता जैसे अहम कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री का यह गुजरात दौरा निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास और भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने दौरे को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इसके बाद सुबह करीब 10:15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। इसके पश्चात सुबह लगभग 11 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर आयोजित एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे।
कार्यक्रम के समापन के बाद प्रधानमंत्री राजकोट के लिए रवाना होंगे, जहां वे कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में निवेश, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण संवाद होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक विकास—तीनों ही दृष्टियों से यह दौरा अहम माना जा रहा है।
इसके बाद दोपहर लगभग 2 बजे प्रधानमंत्री राजकोट के मारवाड़ी विश्वविद्यालय में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित भी करेंगे। यह सम्मेलन 11 से 12 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन विशेष रूप से कच्छ और सौराष्ट्र के 12 जिलों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पश्चिमी गुजरात में निवेश, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति देना है।
प्रधानमंत्री के इस दौरे में क्षेत्रीय विकास और निवेश के लिए कई योजनाओं और पहलों की घोषणा की संभावना है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं।
सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, रवांडा और यूक्रेन जैसे देश भी भागीदार होंगे। सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री राजकोट से अहमदाबाद के लिए रवाना होंगे, जहां शाम करीब 5:15 बजे महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे चरण के सेक्टर 10A से महात्मा मंदिर तक के शेष हिस्से का उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ 12 और 13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह जर्मन चांसलर की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस दौरे का एजेंडा धार्मिक, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों क्षेत्रों को कवर करता है, और यह गुजरात के निवेश और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की कोशिश का प्रतीक माना जा रहा है।
सुबह करीब 9:30 बजे प्रधानमंत्री और जर्मन चांसलर साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे, जहां वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से परिचित होंगे। इसके तुरंत बाद सुबह करीब 10 बजे दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शामिल होंगे, जिसमें पर्यावरण और सांस्कृतिक पहलुओं को भी उजागर किया जाएगा।
सुबह 11:15 बजे गांधीनगर के महात्मा मंदिर में प्रधानमंत्री और जर्मन चांसलर के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इस वर्ष भारत-जर्मनी साझेदारी के 25 साल पूरे हुए हैं।
द्विपक्षीय वार्ता का फोकस व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और गतिशीलता के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर रहेगा। इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान, हरित और सतत विकास तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूती देने पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री के इस दौरे का यह दिन सांस्कृतिक, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और यह भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा देने का अवसर भी प्रस्तुत करता है।



