अमेरिका के साथ टैरिफ और ट्रेड को लेकर जारी तनाव के बीच भारत अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार के क्षेत्र में नया इतिहास रचने के करीब पहुंच गया है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने की संभावना जताई जा रही है। इसी कड़ी में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गई हैं।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन को 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनाया गया है। इसके बाद वह भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते से जुड़ी अहम वार्ताओं में हिस्सा लेंगी। उनकी इस यात्रा को अमेरिका द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाए जाने के संदर्भ में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने किया स्वागत
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का नई दिल्ली हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने स्वागत किया। जितिन प्रसाद वर्तमान में वाणिज्य एवं उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री हैं। यह स्वागत भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
गणतंत्र दिवस में दो EU नेता होंगे शामिल
उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सांतोस दा कोस्टा (एंटोनियो कोस्टा) भी गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। दोनों नेता 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राज्य यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई अहम बैठकों के होने की संभावना है।
यह यात्रा भारत और EU के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार वार्ताओं को गति देने के साथ-साथ रणनीतिक, व्यापारिक और भू-राजनीतिक सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर होने वाली परेड में यूरोपीय संघ के दोनों शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह पहला मौका होगा जब EU के दो प्रमुख नेता एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इससे भारत की वैश्विक छवि और बहुपक्षीय कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक मुद्दों पर भी होगी अहम बातचीत
भारत-EU एफटीए के अलावा इस यात्रा के दौरान जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकी और वैश्विक व्यापार जैसे अहम विषयों पर भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा होगी। अमेरिका की ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बीच इस दौरे को भारत-EU संबंधों के लिए “मदर ऑफ ऑल डील्स” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत सरकार ने इस यात्रा को भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझा मूल्यों, लोकतंत्र, बहुपक्षवाद और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है, जिसमें यूरोप के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।



