भोपाल।
मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। राज्य सरकार ने सिंहस्थ के सफल आयोजन और श्रद्धालुओं की बेहतर सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है। यह मांग केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई अहम बैठक में रखी गई।
शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की प्री-बजट मीटिंग के दौरान मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ 2028 के दौरान 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना है, जिसे देखते हुए बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं के विकास की जरूरत है।
श्रद्धालुओं के लिए होंगे व्यापक इंतजाम
वित्त मंत्री ने बताया कि सिंहस्थ को लेकर उज्जैन में सड़कें, पुल-पुलिया, क्षिप्रा नदी पर पक्के घाट, ठहरने की सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता और आधुनिक अस्पतालों का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि सिंहस्थ न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में केंद्र से मिलने वाला विशेष पैकेज उज्जैन को विश्वस्तरीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 15वें वित्त आयोग ने मध्यप्रदेश का सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) 16.94 लाख करोड़ रुपये आंका है, जबकि केंद्र सरकार कर्ज सीमा तय करने के लिए 15.44 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को आधार मान रही है।
मप्र सरकार का तर्क है कि यदि वित्त आयोग के आंकड़ों को स्वीकार किया जाए, तो राज्य को करीब 4500 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति मिल सकेगी। इससे सिंहस्थ 2028 समेत अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन और मजबूत होंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि अतिरिक्त कर्ज सीमा और केंद्र से मिलने वाला विशेष पैकेज उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।



