भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी कॉलेज खोलने और उनके संचालन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने नियमों में सख्ती की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू नए प्रावधानों के तहत कॉलेजों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी, गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर जुर्माने से लेकर मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकेगी।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जमीन की शर्त तय
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में निजी कॉलेज खोलने के लिए कम से कम दो एकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में चार एकड़ जमीन की अनिवार्यता तय की गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य कॉलेजों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं और परिसर की उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
किराए के भवन में संचालन की समयसीमा निर्धारित
नए नियमों के तहत निजी कॉलेजों को किराए के भवन में अधिकतम पांच साल तक संचालन की अनुमति होगी। इसके बाद संबंधित संस्थान को अपने भवन में स्थानांतरित होना पड़ेगा। इससे कॉलेज प्रबंधन को निर्धारित समयसीमा में स्थायी भवन की व्यवस्था करनी होगी।
कॉलेजों के नामकरण पर भी प्रतिबंध
नए प्रावधानों में कॉलेजों के नाम को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। इनके अनुसार, संस्थानों के नाम में ‘इंडियन’, ‘नेशनल’, ‘भारतीय’, ‘राष्ट्रीय’ और किसी जाति विशेष के नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई है।
फर्जी दस्तावेज देने पर मान्यता रद्द, ₹5 लाख तक का जुर्माना
नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के प्रावधान भी सख्त किए गए हैं। यदि कोई कॉलेज प्रबंधन फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करता है या गलत जानकारी देकर अनुमति प्राप्त करने की कोशिश करता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित प्रबंधन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान बताया गया है।
कॉलेज संचालकों को करना होगा नियमों का पालन
नए प्रावधानों से निजी कॉलेज संचालकों को जमीन, भवन और दस्तावेजों से जुड़ी शर्तों को पूरा करने पर विशेष ध्यान देना होगा। इन नियमों का उद्देश्य संस्थानों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और निर्धारित मानकों के अनुरूप कॉलेजों का संचालन सुनिश्चित करना है।




