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Dainik Kunj > Latest Posts > ट्रेंडिंग > मुंबई में ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का गेम ओवर! ‘मराठी मानुस’ का एजेंडा फेल, 20 साल बाद साथ आए दोनों भाइयों की दुर्गति के 5 बड़े कारण
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मुंबई में ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का गेम ओवर! ‘मराठी मानुस’ का एजेंडा फेल, 20 साल बाद साथ आए दोनों भाइयों की दुर्गति के 5 बड़े कारण

Roshni Bisen
Roshni Bisen
Roshni Bisen - Editor dainikkunj.com
ByRoshni Bisen
रोशनी बिसेन dainikkunj.com की संपादक हैं, जो निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित हैं।
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Published: January 16, 2026
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BMC Election Results 2026: महाराष्ट्र में बीजेपी गठबंधन का दबदबा, 30 साल बाद बीएमसी में सत्ता परिवर्तन

महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत 29 निकाय चुनावों के नतीजे आज शुक्रवार को घोषित हो रहे हैं। शुरुआती और रुझानों के मुताबिक 29 में से 23 नगर निगमों में बीजेपी नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन आगे चल रहा है। मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में भी बीजेपी गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की है।

सबसे अहम मुकाबले वाली एशिया की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) में इस बार ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। करीब 30 साल बाद बीएमसी की सत्ता पर बीजेपी काबिज होती नजर आ रही है, जिससे मुंबई की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है।

बीएमसी चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाली महायुति के आगे ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का गेम ओवर होता दिखाई दे रहा है। 20 साल बाद एक मंच पर आए दोनों ठाकरे भाइयों का ‘मराठी मानुस’ एजेंडा जनता को प्रभावित करने में नाकाम रहा। नतीजतन, 30 साल तक बीएमसी पर राज करने वाली उद्धव ठाकरे की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर शासन जैसे मुद्दों पर बीजेपी गठबंधन ने बढ़त बनाई, जबकि भावनात्मक और क्षेत्रीय एजेंडे इस बार मतदाताओं को साधने में नाकाम रहे।

इन नतीजों के साथ ही साफ हो गया है कि मुंबई का नया बॉस अब बीजेपी गठबंधन है, और महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में ताकत का संतुलन पूरी तरह बदल चुका है।

वहीं ‘ठाकरे ब्रदर्स’ (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) की ताकत इस चुनाव में भारी झटका खाई। रूझानों के मुताबिक उनका दल सिर्फ 72 सीटों पर सिमट गया, जिससे 30 साल तक बीएमसी पर राज करने वाली ठाकरे पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव में विकास और शहरी एजेंडे ने मतदाताओं पर भारी प्रभाव डाला, जबकि ‘मराठी मानुस’ का भावनात्मक एजेंडा सफल नहीं हो सका। इस तरह मुंबई का नया बॉस अब बीजेपी गठबंधन बन चुका है।

मुंबई में ठाकरे बंधुओं की दुर्गति: 20 साल बाद साथ आने के बावजूद बीएमसी में हार के 5 बड़े कारण

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 में ठाकरे बंधुओं (उद्धव और राज ठाकरे) की लंबी राजनीतिक सत्ता पर बड़ा झटका लगा। 30 साल तक बीएमसी पर काबिज रहने वाली ठाकरे पार्टी को बीजेपी नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत से पछाड़ दिया। कुल 2869 वार्डों में से 1553 के रुझान सामने आ चुके हैं, जिसमें बीजेपी आधे से ज्यादा वार्डों में आगे है।

राज ठाकरे को साथ लेकर चुनाव लड़ना भी उद्धव ठाकरे के लिए फायदेमंद साबित नहीं हुआ। ‘मराठी मानुस’ एजेंडा जनता ने खारिज कर दिया। एक्सिस माय इंडिया के अनुसार, ठाकरे गठबंधन को मराठी वोटों में 49% शेयर मिला, लेकिन मुंबई में मराठी वोटर केवल 38% हैं। गैर-मराठी वोटों को जोड़ने में महायुति ने भारी बढ़त बनाई।

विश्लेषकों के मुताबिक, ठाकरे बंधुओं की इस दुर्गति के 5 मुख्य कारण हैं:


1. ठाकरे ब्रदर्स का ‘मराठी मानुस’ एजेंडा फेल

राज ठाकरे ने एमएनएस बनाकर उम्मीद जगाई थी कि वह शिवसेना का स्वाभाविक उत्तराधिकारी बन सकते हैं। हालांकि समय के साथ उनका अवसरवादी रुख (कभी मराठी, कभी हिंदुत्व, कभी बीजेपी से नजदीकी) मतदाताओं का भरोसा नहीं जीत सका। संगठन का विस्तार भी सीमित रहा और स्थानीय मुद्दों पर स्थिर राजनीति न होने के कारण एमएनएस बीएमसी चुनाव में निर्णायक भूमिका नहीं निभा पाई।

2. कांग्रेस की बजाय राज ठाकरे के साथ गठबंधन रणनीतिक भूल

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस छोड़कर राज ठाकरे का साथ चुना, जो मुंबई में संगठनात्मक रूप से कमजोर थे। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर भारतीय मतदाता गठबंधन से दूर हो गए, और बीजेपी-शिंदे गुट की ओर चले गए। कांग्रेस के साथ रहने पर बेहतर प्रदर्शन संभव था, लेकिन उद्धव ने यह अवसर गंवा दिया।

3. मराठी वोटों का विभाजन

ठाकरे बंधुओं ने केवल ‘मराठी मानुस’ पर जोर दिया, जबकि मुंबई में गैर-मराठी वोटर कुल 30-35% हैं। बीजेपी ने इन मतदाताओं को मजबूती से जोड़ा। गैर-मराठी और यहां तक कि कुछ मराठी मतदाता भी ठाकरे गठबंधन से नाराज नजर आए।

4. ‘ठाकरे ब्रांड’ का कमजोर होना और जनता से कनेक्ट टूटना

2022 के शिवसेना विभाजन और धनुष-बाण चिन्ह के शिंदे गुट को मिलने के बाद ठाकरे परिवार की साख कमजोर हो गई। आम जनता और युवा मतदाताओं से कनेक्ट टूट गया, और 18-25 आयु वर्ग में बीजेपी को भारी समर्थन मिला।

5. बीजेपी का आक्रामक विस्तार और शिंदे सेना को महत्व देना

बीजेपी ने पिछले दशक में मुंबई में संगठन मजबूत किया और संसाधन, प्रचार व नेतृत्व के सभी स्तरों पर बढ़त बनाई। उत्तर भारतीय, गुजराती और मध्यमवर्गीय हिंदुत्व समर्थक वर्ग भाजपा के साथ संगठित हो गया।


इस तरह, ठाकरे बंधुओं का 20 साल बाद साथ आना भी उन्हें बीएमसी की सत्ता से दूर नहीं रख सका, और मुंबई का नया बॉस बीजेपी नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन बन गया।

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