भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 13 अक्टूबर को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर तड़के भस्म आरती संपन्न हुई। नवरात्रि के तीसरे दिन बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अभिषेक कर मनमोहक श्रृंगार किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।
पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा का दिव्य श्रृंगार
मंगलवार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक-पूजन संपन्न हुआ। फिर बाबा महाकाल को भांग और चंदन अर्पित कर आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पित कर किया गया अलौकिक श्रृंगार
पूजन और आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और पुष्पों से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने भक्तों का मन मोह लिया।
नंदी महाराज के दर्शन कर भक्तों ने मांगी मनोकामना
भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर उनके पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में हर ओर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे सुनाई देते रहे।
भस्म आरती का है विशेष धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन का विशेष महत्व है। बाबा महाकाल की भस्म आरती को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। नवरात्रि के पावन अवसर पर बाबा के विशेष श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का अनुपम अनुभव बन गए।




