भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार, 11 अक्टूबर को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर तड़के भस्म आरती संपन्न हुई। नवरात्रि के प्रथम दिन बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अभिषेक कर भव्य एवं दिव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
महाकालेश्वर मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा का अभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। नवरात्रि की प्रतिपदा पर बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
भस्म अर्पण के बाद सजे बाबा महाकाल
पूजन और आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। विभिन्न आभूषणों और पुष्पों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के निराकार स्वरूप को साकार रूप में दर्शन देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि महाकाल की भस्म आरती को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए और नंदी महाराज के सामने शीश नवाया। कई भक्तों ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर उनके पूर्ण होने की प्रार्थना की।
नवरात्रि के प्रथम दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन नजर आए। मंदिर में सुबह से ही आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा।




