कोटा (राजस्थान)। राजस्थान के कोटा जिले के ग्राम रींछी में आयोजित 38वें निशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह आयोजन मुल्की पंचायत यदुवंशी अहिरान एवं यदुवंशी मुल्की अहीर समिति के तत्वाधान में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन धर्म के 16 संस्कारों में विवाह संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। उन्होंने कहा कि बेटियां परिवारों को जोड़ने का माध्यम हैं और उन्हें समाज में विशेष सम्मान प्राप्त है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सदैव धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष Om Birla और राजस्थान के शिक्षा मंत्री Madan Dilawar भी मौजूद रहे और उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकारें सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि समाज में फिजूलखर्ची और दिखावे की प्रवृत्ति कम हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी अपने परिवार में सामूहिक विवाह जैसी परंपरा को अपनाया है, जो सादगी का संदेश देती है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि विवाह जैसे अवसरों पर अनावश्यक खर्च और कर्ज लेने से बचें तथा सरल और जिम्मेदार तरीके से आयोजन करें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ महाकुंभ में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पार्वती–कालीसिंध–चंबल नदी जोड़ो परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच सहयोग और विकास को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों राज्यों के लिए समृद्धि के नए अवसर खोलेगी।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है और रामगंज मंडी के पास स्थित प्राचीन मंदिर के विकास में पूर्ण सहयोग देने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन के सदस्य और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



