भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों से जुड़े मामलों में अहम फैसला ले सकते हैं। दोनों दलों ने अपने-अपने बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और बागी सांसदों की दलीलें सुन ली हैं। शिवसेना (UBT) मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है। संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञ पुराने फैसलों और न्यायिक नजीरों का अध्ययन कर रहे हैं, जबकि कानून मंत्रालय से भी राय ली जा सकती है। माना जा रहा है कि 20 जुलाई से पहले अंतिम निर्णय सामने आ सकता है।
TMC के 2024 लोकसभा चुनाव में निर्वाचित 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का साथ लिया है। बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था और NDA का समर्थन करने की इच्छा भी जताई है।
वहीं, शिवसेना (UBT) के नौ सांसदों में से छह ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की घोषणा की है। दोनों दलों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत छूट तभी मिल सकती है, जब किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग हों। ऐसे में अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी है।



