भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
उज्जैन। Mahakal Bhasma Aarti: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 14 जुलाई को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के अवसर पर तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का चंद्र मुकुट, त्रिपुंड, रुद्राक्ष, रजत आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर भांग, चंदन और आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के पश्चात भगवान को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला तथा विभिन्न पुष्पमालाएं अर्पित कर आकर्षक अलंकरण किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सुबह की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं और पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे।



