भोपाल/उज्जैन। डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित करता आया है। विरासत से विकास के प्रतीक के रूप में यहां आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव 2026 केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक स्वाभिमान का विराट पर्व है।
रविवार को उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि महान सम्राट विक्रमादित्य ने न्याय, सुशासन और लोककल्याण की ऐसी परंपरा स्थापित की, जो आज भी प्रेरणास्रोत है। उनका शासनकाल विद्या, विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के स्वर्णिम युग के रूप में विश्वविख्यात रहा। विक्रम संवत और भारतीय कालगणना हमारी वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक समृद्धि के प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में एक करोड़ एक लाख रुपये का ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण सम्मान’ स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अलंकरण भारत की सांस्कृतिक गरिमा को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई देगा।
सीएम ने बताया कि विक्रमोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। वर्ष 2024 के आयोजन को एशिया का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव अवार्ड मिला, वहीं 2025 में इसे ग्लोबल स्तर पर सम्मानित किया गया। आने वाले वर्षों में भी यह महोत्सव अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन को पृथ्वी का नाभि स्थल कहा जाता है और आगामी सिंहस्थ 2028 को भव्य, व्यवस्थित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु फोर लेन और सिक्स लेन सड़कों का विस्तार किया जा रहा है। क्षिप्रा नदी के 30 किलोमीटर लंबे घाटों का विकास तथा नदी को निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कालगणना को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से वैदिक घड़ी की स्थापना की गई है और हमारी परंपराओं के अनुरूप ‘मंगलकामनाएं’ देने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष तथा 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।
कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने भी संबोधित किया। 139 दिवसीीय विक्रमोत्सव में 41 से अधिक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बहुरंगी महोत्सव में प्रदर्शनी, कलश यात्रा, संगीत संध्या, विक्रम व्यापार मेला और अकादमिक सत्र भी शामिल होंगे। प्रदेशभर में विक्रमोत्सव को लेकर उत्साह और उल्लास का वातावरण है।



