नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह कभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। 15 फरवरी को एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति के भीतर एक “सकारात्मक बेचैनी” होना जरूरी है, क्योंकि वही निरंतर बेहतर काम करने की प्रेरणा देती है।
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर क्या बोले पीएम
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत हो रहे बदलावों से संतुष्ट हैं, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और हो भी नहीं सकते। उनका मानना है कि उनका स्वभाव लगातार आगे बढ़ने और सुधार करते रहने का है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब तक हुए विकास कार्यों और सुधारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार उनकी सरकार की मूल प्रतिबद्धता है और इसे पूरी निष्ठा के साथ लागू किया जा रहा है। छोटे-मोटे बदलावों के बजाय व्यवस्था में बुनियादी और संरचनात्मक परिवर्तन किए गए हैं, जिनका असर अब दिखाई दे रहा है।
38 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
पीएम मोदी ने बताया कि भारत ने अब तक 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भी लंबे समय से चल रही चर्चा के बाद दोनों पक्षों के लिए लाभकारी समझौता संभव हो पाया। इन समझौतों से भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच मिली है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
बढ़ रही भारत की वैश्विक भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत की वैश्विक भागीदारी तेजी से बढ़ी है। ये व्यापार समझौते अचानक नहीं हुए, बल्कि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, प्रतिस्पर्धी उद्योग और आत्मविश्वास से भरे दृष्टिकोण का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान भी प्रयास हुए थे, लेकिन ठोस परिणाम नहीं निकल पाए। आज भारत सुधारों के जरिए नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और यही निरंतर प्रगति की भावना उन्हें कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने देती।



