भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
धर्म डेस्क: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक अस्त (दग्ध) रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगभग 25 दिनों तक विराम रहेगा। गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, संतान, शिक्षा, विवाह और भाग्य का कारक माना जाता है, इसलिए उनके अस्त होने का प्रभाव कई क्षेत्रों में महसूस किया जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान गुरु सूर्य के अत्यधिक निकट होने के कारण आकाश में दिखाई नहीं देते, जिसे ‘गुरु तारा डूबना’ कहा जाता है। हालांकि, पूजा-पाठ, व्रत, साधना और पहले से चल रहे कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं। वर्तमान में गुरु कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जो उनकी उच्च राशि मानी जाती है। इसलिए इस अवधि का प्रभाव पूरी तरह नकारात्मक नहीं होगा, लेकिन बड़े निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।
12 राशियों पर गुरु अस्त का प्रभाव
- मेष: करियर और परिवार में संतुलन रखें, बड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें।
- वृषभ: आर्थिक मामलों में सतर्क रहें, खर्च और निवेश पर नियंत्रण रखें।
- मिथुन: करियर और धन संबंधी निर्णय सोच-समझकर लें, गलतफहमियों से बचें।
- कर्क: स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन बनाए रखें, प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा।
- सिंह: खर्च बढ़ सकता है और योजनाओं में देरी हो सकती है।
- कन्या: कार्यक्षेत्र में सावधानी रखें, नई योजनाएं फिलहाल टालना बेहतर होगा।
- तुला: करियर में धीमापन संभव, अधिकारियों के साथ संयम बनाए रखें।
- वृश्चिक: भाग्य का साथ मिलेगा, लेकिन हर निर्णय सोच-समझकर लें।
- धनु: निवेश और उधार से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतें।
- मकर: रिश्तों और साझेदारी में धैर्य रखें, विवादों से बचें।
- कुंभ: स्वास्थ्य और दिनचर्या पर ध्यान दें, मेहनत का फल मिलने में समय लग सकता है।
- मीन: समय अपेक्षाकृत अनुकूल रहेगा, फिर भी बड़े फैसलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 15 जुलाई से 9 अगस्त तक का समय धैर्य, संयम, आत्मचिंतन और नियमित कार्यों पर ध्यान देने के लिए उपयुक्त माना गया है। बड़े शुभ और मांगलिक कार्यों को इस अवधि के बाद करना अधिक शुभ माना जाता है।



