मध्य प्रदेश में एक बार फिर प्रॉपर्टी की दरें बढ़ने की संभावना बन गई है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार को महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने इस संबंध में आदेश जारी किए, जिसके साथ ही नई गाइडलाइन बनाने की औपचारिक कवायद भी शुरू हो गई है।
- 15 जनवरी तक तैयार होंगे जिलेवार प्रस्ताव
- 31 मार्च से लागू होंगी नई दरें
- एआई सर्वे तय करेगा किन क्षेत्रों में बढ़ेगी कीमत
- पिछली बार 60 हजार स्थानों पर बढ़ी थी गाइडलाइन
- 15 जनवरी तक उप जिला समितियां भेजेंगी प्रस्ताव
- 31 मार्च से लागू होंगी नई दरें
- नए प्रस्ताव तैयार करते समय किन बिंदुओं का ध्यान रखा जाएगा?
- ✔️ 1. दरों में वृद्धि, कमी या यथावत रखने का आधार स्पष्ट हो
- ✔️ 2. भूमि अधिग्रहण वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
- ✔️ 3. मूल्य सूचकांक और स्थानीय विकास का मूल्यांकन
- ✔️ 4. मौजूदा बाजार दरों के अनुरूप मूल्य तय करने पर जोर
- ✔️ 5. निर्माण लागत दरों का भी रखा जाएगा ध्यान
- प्रदेश में 74 हजार लोकेशनों पर होगा एआई सर्वे
आदेश के अनुसार, सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों को नई गाइडलाइन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार करके 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्तावित गाइडलाइन की अधिसूचना जारी करेगी और आमजन, संगठनों व राजनीतिक दलों से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
गाइडलाइन संशोधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। इसका असर रजिस्ट्री शुल्क और जमीन खरीदने की लागत पर भी पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में एक बार फिर प्रॉपर्टी की दरों में बढ़ोतरी की तैयारी शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किए, जिसके बाद से सभी जिलों में प्रस्ताव तैयार करने का काम गति पकड़ चुका है।
15 जनवरी तक तैयार होंगे जिलेवार प्रस्ताव
आदेश के मुताबिक, सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों को नई गाइडलाइन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला समिति प्रस्तावित गाइडलाइन की अधिसूचना जारी कर आमजन व राजनीतिक दलों से सुझाव मांगेगी।
31 मार्च से लागू होंगी नई दरें
प्राप्त सुझावों पर चर्चा के बाद आवश्यक संशोधनों के साथ प्रस्ताव को 30 जनवरी तक अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद सभी जिला मूल्यांकन समितियां 15 फरवरी तक अपना प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजेंगी। शासन से चर्चा के बाद बोर्ड 31 मार्च से पूरे प्रदेश में नई प्रॉपर्टी दरें लागू कर देगा।
एआई सर्वे तय करेगा किन क्षेत्रों में बढ़ेगी कीमत
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में कुल 1 लाख 12 हजार स्थानों में से लगभग 74 हजार लोकेशनों पर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त सबसे अधिक होती है। इन क्षेत्रों में पंजीयन और राजस्व अधिकारी एआई व अन्य तकनीकी माध्यमों से विस्तृत सर्वे कराएंगे। इसी सर्वे के आधार पर तय किया जाएगा कि किन-किन स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरें बढ़ाई जाएं।
पिछली बार 60 हजार स्थानों पर बढ़ी थी गाइडलाइन
वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 60 हजार स्थानों पर प्रॉपर्टी दरों में वृद्धि की गई थी। हालांकि आवासीय आरसीसी निर्माण एवं विभिन्न क्षेत्रों में आरबीसी, टिनशेड और कच्चे कवेलू जैसी श्रेणियों की निर्माण दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी।
नई गाइडलाइन लागू होने के बाद प्रदेश में जमीन खरीदना, प्लॉट लेना और रजिस्ट्री कराना महंगा हो सकता है।
मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की दरें एक बार फिर बढ़ने जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसी के साथ जमीन, प्लॉट और रजिस्ट्री की लागत बढ़ने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर द्वारा जारी आदेश के बाद जिलावार प्रस्ताव तैयार करने का काम पूरे राज्य में सक्रिय हो चुका है।
15 जनवरी तक उप जिला समितियां भेजेंगी प्रस्ताव
सभी उप जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नई गाइडलाइन का प्रारूप तैयार कर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजें। इसके बाद जिले प्रस्तावित गाइडलाइन की अधिसूचना जारी कर लोगों और राजनीतिक दलों से सुझाव आमंत्रित करेंगे।
31 मार्च से लागू होंगी नई दरें
सभी सुझावों पर चर्चा के बाद प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन कर 30 जनवरी तक इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। जिले 15 फरवरी तक इसे केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज देंगे। शासन से विमर्श के बाद बोर्ड 31 मार्च से नई दरें पूरे प्रदेश में लागू कर देगा।
नए प्रस्ताव तैयार करते समय किन बिंदुओं का ध्यान रखा जाएगा?
नई कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करते समय जिला और उप जिला समितियों को कई महत्वपूर्ण पहलू ध्यान में रखने होंगे:
✔️ 1. दरों में वृद्धि, कमी या यथावत रखने का आधार स्पष्ट हो
नए स्थान या कॉलोनियाँ जोड़ने की स्थिति में दरें निर्धारित करने के लिए आवश्यक अनुमतियों की जानकारी और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराना होगा।
✔️ 2. भूमि अधिग्रहण वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
जहां भूमि अधिग्रहण चल रहा है या भविष्य में होने की संभावना है, वहां संभावित विकास को देखते हुए दरें प्रस्तावित की जाएंगी।
✔️ 3. मूल्य सूचकांक और स्थानीय विकास का मूल्यांकन
नगर और ग्राम क्षेत्रों में हुए तथा प्रस्तावित विकास और मूल्य सूचकांक को ध्यान में रखते हुए दरों में समायोजन किया जाएगा।
✔️ 4. मौजूदा बाजार दरों के अनुरूप मूल्य तय करने पर जोर
प्रस्तावित दरें वास्तविक बाजार दरों से मेल खाती हों, इसका विशेष ध्यान रखने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
✔️ 5. निर्माण लागत दरों का भी रखा जाएगा ध्यान
पिछले वर्षों में निर्माण के लिए तय लागत दरों को आधार बनाकर ही प्लॉट और जमीन दरों में बदलाव प्रस्तावित किया जाएगा।
प्रदेश में 74 हजार लोकेशनों पर होगा एआई सर्वे
प्रदेश के कुल 1.12 लाख स्थानों में से लगभग 74 हजार लोकेशनों पर खरीद-फरोख्त ज्यादा होती है। इन स्थानों पर एआई सहित आधुनिक तकनीकों से सर्वे कराया जाएगा। इसी सर्वे के आधार पर तय होगा कि किन क्षेत्रों में दरें बढ़ाई जाएं।
पिछली गाइडलाइन में करीब 60 हजार स्थानों पर दरों में वृद्धि की गई थी।




