संसद सत्र में रचनात्मक विपक्ष की अपील: पीएम मोदी
नई दिल्ली: संसद का बहुप्रतीक्षित शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विपक्षी दलों से आग्रह किया है कि वे चुनावी हार की निराशा से ऊपर उठें और सत्र को देश के भविष्य के लिए समर्पित करें।
प्रधानमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए जोर देकर कहा कि संसद की कार्यवाही “देश के लिए क्या सोच रही है, देश के लिए क्या करना चाहती है, और क्या करने वाली है,” इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए।
मुख्य अपीलें और टिप्पणियाँ:
- विपक्ष का दायित्व: पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष को अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए और चर्चा के दौरान “मजबूत मुद्दे” उठाने चाहिए।
- पराजय की निराशा: उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ पार्टियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “एकाध पार्टी तो ऐसी हैं जो पराजय ही नहीं पचा पाते,” यह टिप्पणी हालिया चुनावों के परिणामों के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि हार ने कुछ दलों को “परेशान” कर दिया है।
- एजेंडा पर ध्यान दें: प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश सत्र को राजनीतिक कटुता से दूर रखना और इसे सार्थक राष्ट्रीय बहस का मंच बनाना था।
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद हताशा में आकर संसद के कीमती समय को बर्बाद न करें, बल्कि सकारात्मक राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें।
“पराजय से बौखलाहट और विजय से अहंकार न हो”
सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “पराजय से बौखलाहट नहीं होना चाहिए, [और] विजय से अहंकार नहीं होना चाहिए।” उन्होंने सत्तारूढ़ पक्ष को भी आगाह किया कि यह सत्र “विजय के अहंकार में” नहीं बदलना चाहिए।
“ड्रामा नहीं, डिलीवरी चाहिए”
प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अपनी निराशा से बाहर निकलने का आग्रह किया और संसद के अंदर की कार्यवाही पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने दो टूक कहा:
- “ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है, जिसको करना है करते रहे।”
- “यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।”
- “यहां नारे नहीं, नीति पर बल देना चाहिए और वो आपकी नीयत होनी चाहिए।”
“राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच जरूरी”
पीएम मोदी ने स्वीकार किया कि शायद राजनीति में नकारात्मकता कुछ हद तक काम आती होगी, लेकिन राष्ट्र निर्माण जैसे गंभीर कार्य के लिए सकारात्मक सोच और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद का उपयोग सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए नहीं, बल्कि देशहित के मुद्दों पर ठोस काम करने के लिए होना चाहिए।
पीएम मोदी का विपक्ष पर बड़ा हमला: “हाउस में हार का गुस्सा निकालना बंद करें, मैं टिप्स देने को तैयार हूँ”
संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर अपनी हताशा और चुनावी हार का गुस्सा संसद के भीतर निकालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राज्य केंद्रित राजनीति छोड़कर राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
“संसद का इस्तेमाल इलेक्शन वार्म-अप या गुस्सा निकालने के लिए हो रहा”
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “अगर हमारे मीडिया के दोस्त विश्लेषण करें, तो उन्हें पता चलेगा कि पिछले कुछ समय से इस हाउस का इस्तेमाल या तो इलेक्शन वार्म-अप के लिए किया जा रहा है या हार का गुस्सा निकालने के लिए।”
उन्होंने आगे कहा कि कुछ राज्यों में सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) इतनी ज्यादा है कि वहां के नेता जनता तक पहुंच नहीं पाते, “और इसलिए वे अपना सारा गुस्सा हाउस में निकालते हैं।”
“रणनीति बदलें, मैं टिप्स देने के लिए तैयार हूँ”
पीएम मोदी ने विपक्ष द्वारा संसद का उपयोग राज्य की राजनीति के लिए करने के “नए ट्रेंड” की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष पिछले 10 सालों से एक ही रणनीति अपना रहा है, जिसे देश ने अस्वीकार कर दिया है।
मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, “उन्हें कम से कम अपने तरीके और अपनी स्ट्रेटेजी बदलनी चाहिए। मैं उन्हें टिप्स देने के लिए तैयार हूं कि उन्हें कैसा परफॉर्म करना चाहिए।” उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विपक्ष के हंगामे के कारण सांसदों के अधिकारों और चर्चा के समय की अनदेखी न हो।
“यह सत्र सिर्फ रस्म नहीं, प्रगति में ऊर्जा भरने का काम करेगा”
प्रधानमंत्री ने शीतकालीन सत्र के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सत्र केवल एक “रस्म” नहीं है, बल्कि “राज्य को प्रगति की ओर तेज गति से लेने जाने” के प्रयासों में ऊर्जा भरने का काम करेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और “विकसित भारत” का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में यह सत्र नया विश्वास और ताकत देगा।
पीएम मोदी की विपक्ष को नसीहत: “हार की निराशा छोड़ें, संसद को राष्ट्रहित के मुद्दों पर केंद्रित रखें”
संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से सत्र को गरिमापूर्ण और रचनात्मक बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने विपक्ष से विधानसभा चुनावों में मिली हार की हताशा से बाहर आने और सत्तारूढ़ पक्ष से जीत के अहंकार से बचने की अपील की है।
“सत्र में पराजय की बौखलाहट या विजय का अहंकार न हो”
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि संसद की कार्यवाही देश के भविष्य के लिए समर्पित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए और ये शीतकालीन सत्र विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सत्र को इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि “संसद देश के लिए क्या सोच रही है, संसद देश के लिए क्या करना चाहती है, संसद देश के लिए क्या करने वाली है।”
“कुछ दल हार पचा नहीं पाते, बिहार के नतीजों पर भी टिप्पणी की”
पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि “1-2 दल तो ऐसे हैं कि वो पराजय भी नहीं पचा पाते।” उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए बिहार चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि नतीजों को काफी समय बीत चुका है, लेकिन कल की बयानबाजियों से लगता है कि हार ने उन्हें अभी भी परेशान कर रखा है।
उन्होंने विपक्ष से अपना दायित्व निभाने, चर्चा में मजबूत मुद्दे उठाने और “पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आने” का आग्रह किया।
“भारत ने सिद्ध किया – Democracy Can Deliver”
प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की मजबूती की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर अर्थतंत्र की मजबूती को बहुत बारीकी से देख रही है।
मोदी ने कहा, “भारत ने सिद्ध कर दिया है कि Democracy can deliver (लोकतंत्र नतीजे दे सकता है)।” उन्होंने कहा कि जिस गति से भारत की आर्थिक स्थिति नई ऊंचाइयों को छू रही है, वह विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नया विश्वास और ताकत देती है।
“रिकॉर्ड वोटिंग डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी ताकत”
प्रधानमंत्री ने हाल के चुनावों में हुई रिकॉर्ड वोटिंग की भी सराहना की, खासकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने “नई उम्मीद और नया विश्वास” बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और उसके अंदर अर्थव्यवस्था का मजबूत होना, दोनों ही आज दुनिया की नजर में हैं।



