भोपाल। मध्य प्रदेश में होली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रंग और गुलाल की बिक्री तेज हो गई है, लेकिन नकली और केमिकल युक्त रंगों की खुलेआम बिक्री ने लोगों की सेहत पर खतरा खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि मिलावट रोकने के लिए प्रदेश में कई कानून और कड़े प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन रंगों की गुणवत्ता जांचने के लिए न तो स्पष्ट नियम हैं और न ही कोई विशेष लैब व्यवस्था।
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
बाजार में कई कंपनियां अपने रंगों को प्राकृतिक या आयुर्वेदिक बताकर बेच रही हैं, लेकिन इन दावों के समर्थन में प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केमिकल युक्त रंगों से त्वचा जलना, एलर्जी, आंखों में जलन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि नकली और असली रंगों में अंतर करना आम ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए भी मुश्किल है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि सरकार केवल दावे करती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने मांग की कि नकली और मिलावटी रंगों पर सख्त नीति और कड़े प्रावधान बनाए जाएं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान भी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
बीजेपी का जवाब
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि मामले को संज्ञान में लिया जाएगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि होली के दौरान स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन मुस्तैद हैं तथा स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
फिलहाल, होली से पहले बाजारों में बिक रहे रंगों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं और आम जनता सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।



