खजुराहो। विश्व धरोहर स्थल खजुराहो मंदिर समूह में शुक्रवार को 52वें खजुराहो नृत्य समारोह का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि खजुराहो वह पवित्र स्थल है, जहां पत्थरों में भी प्राण बसते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का समारोह भगवान नटराज को समर्पित है, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को देव नटेश भगवान शिव से जोड़ने का अनूठा प्रयास है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है और बजट में संस्कृति विभाग के लिए राशि बढ़ाई गई है।
मुख्यमंत्री ने खजुराहो स्थित कंदरिया महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, वामन मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और पार्वती मंदिर सहित मंदिरों की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि शौर्य, रत्नों और कलाओं का संगम है।
शुभारंभ अवसर पर राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, सांसद वी.डी. शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में नटराज की करण मुद्राओं, खजुराहो केंद्रित कॉफी टेबल बुक और बुंदेली इतिहास-संस्कृति पर आधारित चार पुस्तकों का विमोचन किया गया।
यह प्रतिष्ठित सात दिवसीय आयोजन संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
पहले दिन की प्रस्तुतियां
उद्घाटन दिवस पर संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी मैत्रेयी पहाड़ी (दिल्ली) ने कथक नृत्य के माध्यम से “प्रतिष्ठा : शाश्वत तत्वों का आह्वान” की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जो पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—को समर्पित रही। इसके बाद चेन्नई की अनुराधा वेंकटरमन ने भरतनाट्यम में शिव के स्वप्न रूपों को साकार किया। ओडिसी नृत्यांगना शुभदा वरडाकर (भुवनेश्वर) ने “अभेदम्” के माध्यम से अद्वैत वेदान्त की दार्शनिक अवधारणा “चिदानन्दरूपः शिवोऽहम्” को मंच पर जीवंत किया।
दूसरे दिन की प्रस्तुतियां
समारोह के दूसरे दिन 21 फरवरी 2026 को विश्वदीप (दिल्ली) का कथक, प्रभात मेहतो (झारखंड) का छाऊ और अक्मारल काइना रोवा (कजाकिस्तान) की भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। खजुराहो की ऐतिहासिक धरोहरों के सान्निध्य में शास्त्रीय नृत्य की यह साधना कला प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन रही है।



