New Income Tax Law: 1 अप्रैल से लागू होगा इनकम टैक्स एक्ट 2025, 64 साल पुराने कानून की होगी छुट्टी
देश में 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून लागू होने जा रहा है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 अब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। सरकार का दावा है कि नए कानून में टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि नियमों को ज्यादा आसान, स्पष्ट और विवाद-मुक्त बनाया गया है।
सरकार के अनुसार नया इनकम टैक्स कानून मौजूदा कानून की तुलना में करीब 50 फीसदी छोटा होगा। इसमें जटिल भाषा को सरल किया गया है ताकि आम टैक्सपेयर बिना किसी टैक्स एक्सपर्ट की मदद के भी नियम समझ सकें। कई गैर-जरूरी सेक्शन हटाए गए हैं और पुराने व बेकार प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे टैक्स विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है।
Assessment Year का झंझट खत्म
अब तक इनकम टैक्स में प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे शब्द टैक्सपेयर्स को भ्रमित करते थे। नए कानून में इन्हें हटाकर सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ की व्यवस्था की गई है। इससे ITR भरना और आसान हो जाएगा।
इसके अलावा, तय तारीख के बाद रिटर्न फाइल करने पर भी टैक्सपेयर को TDS रिफंड पाने का अधिकार मिलेगा, जो पहले आसान नहीं था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बजट 2026-27 में टैक्स से जुड़े सभी नए बदलाव—चाहे पर्सनल टैक्स हों, कॉरपोरेट टैक्स या HUF—इसी नए कानून के तहत लागू किए जाएंगे।
टैक्स स्लैब वही, नियम नए
सरकार ने साफ किया है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी टैक्स स्लैब पहले जैसी ही रहेंगी। यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, जिससे सरकारी कमाई पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। बदलाव सिर्फ इतना है कि अब टैक्स से जुड़े नियम ज्यादा साफ, पारदर्शी और समझने में आसान होंगे।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की पहल हुई है। वर्ष 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह लागू नहीं हो सका। बाद में 2017 में गठित कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, भरोसेमंद और विवाद-मुक्त बनाना है।
क्यों जरूरी था नया कानून
इनकम टैक्स एक्ट 1961 उस दौर में बनाया गया था जब भारत की अर्थव्यवस्था आज जैसी डिजिटल और आधुनिक नहीं थी। समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन हुए, जिससे कानून बेहद जटिल हो गया। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा लोगों और सीनियर सिटीज़न्स पर पड़ा। सरकार का मानना है कि बदलते समय के साथ पूरे कानून को नए सिरे से लिखना जरूरी हो गया था, जिसे अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 के जरिए पूरा किया गया है।



