- आतंकवाद की कड़ी निंदा: घोषणापत्र के पाठ में आतंकवाद के सभी रूपों की पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से निंदा की गई है। इस मुद्दे पर G20 के हालिया संवादों में इसे सबसे मजबूत बयानों में से एक माना जा रहा है।
- परिवर्तनकारी डिजिटलीकरण: दस्तावेज़ ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचाना।
- AI का सुरक्षित उपयोग: सुरक्षित, संरक्षित और भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI) के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “हम आतंकवाद की उसके सभी रूपों में निंदा करते हैं।” यह बयान आतंकवाद के वैश्विक खतरे से निपटने के लिए समूह की एकजुटता को रेखांकित करता है।
- AI पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: G20 नेताओं ने नई दिल्ली और रियो डी जेनेरियो घोषणाओं का भी जिक्र किया। नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, इसके लाभों को समान रूप से साझा करने और मानवाधिकारों, पारदर्शिता व जवाबदेही का सम्मान करते हुए इससे जुड़े जोखिमों को कम करने का वादा किया।
- वैश्विक चुनौतियों पर आम सहमति: ये घोषणाएं दर्शाती हैं कि G20 सदस्य देश जलवायु परिवर्तन, आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा जैसी प्रमुख वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने हेतु प्रतिबद्ध हैं।
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ अब तक के सबसे मजबूत बयानों में से एक जारी किया गया, जिसमें कहा गया, “हम आतंकवाद की उसके सभी रूपों में निंदा करते हैं।” यह बयान वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खतरे से लड़ने के लिए G20 देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
- AI पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: नेताओं ने AI पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए नई दिल्ली और रियो डी जेनेरियो घोषणाओं का जिक्र किया। प्रतिबद्धताओं में AI के लाभों को समान रूप से साझा करना और मानवाधिकारों, पारदर्शिता व जवाबदेही का सम्मान करते हुए इससे जुड़े जोखिमों को कम करना शामिल है।
- UNSC सुधारों की मांग: भारत के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम घोषणापत्र के पाठ में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसमें एक अधिक प्रतिनिधिक (रिप्रेजेंटेटिव) और समावेशी (इनक्लूसिव) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसका उद्देश्य UNSC को 21वीं सदी की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने में सक्षम बनाना है।
G20 डिक्लेरेशन में पहली बार अफ्रीका से उठा मजबूत स्वर: हर रूप में आतंकवाद की कड़ी निंदा
अफ्रीका महाद्वीप पर पहली बार आयोजित G20 साउथ अफ्रीका समिट में जारी लीडर्स डिक्लेरेशन में दुनिया भर में बढ़ती अस्थिरता, संघर्षों और जियोपॉलिटिकल तनावों के बीच ‘उबंटू’ की भावना पर आधारित वैश्विक एकजुटता को सबसे अहम बताया गया। जोहान्सबर्ग में हुए दो दिवसीय समिट में G20 नेताओं ने कहा कि कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता और साझा चुनौतियों का समाधान केवल मल्टीलेटरल कोऑपरेशन के ज़रिए ही संभव है।
डिक्लेरेशन में हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए कहा गया कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसे किसी भी रूप, उद्देश्य या औचित्य में स्वीकार नहीं किया जा सकता। नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून, यूनाइटेड नेशंस चार्टर और मानवीय कानून के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।
दुनिया के मौजूदा माहौल—युद्धों, आर्थिक अस्थिरता, बढ़ती असमानता और जियो-इकोनॉमिक तनाव—का उल्लेख करते हुए डिक्लेरेशन में कहा गया कि इन चुनौतियों के बीच देशों को एकजुट होकर काम करना ही होगा। नेताओं ने आम नागरिकों और नागरिक ढांचे पर हमले की निंदा की और सभी संघर्ष क्षेत्रों—जैसे सूडान, कांगो, यूक्रेन और फिलिस्तीनी इलाकों—में स्थायी शांति स्थापित करने का आह्वान किया।
G20 जोहान्सबर्ग डिक्लेरेशन: महिलाओं का सशक्तिकरण, डिजास्टर रेज़िलिएंस, फूड सिक्योरिटी और क्लाइमेट एक्शन पर वैश्विक सहमति
अफ्रीका महाद्वीप में पहली बार आयोजित G20 समिट से निकला जोहान्सबर्ग लीडर्स डिक्लेरेशन एक ऐसे व्यापक एजेंडा का संकेत देता है, जिसमें जेंडर इक्वालिटी, फूड सिक्योरिटी, डिजास्टर रेज़िलिएंस, हेल्थ और क्लाइमेट फाइनेंस जैसे प्रमुख मुद्दों पर ठोस वैश्विक प्रतिबद्धताएँ दर्ज की गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिक्लेरेशन भारत की G20 प्रेसीडेंसी द्वारा स्थापित किए गए बहु-आयामी एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
🌍 महिलाओं का सशक्तिकरण: जेंडर इक्वालिटी पर मजबूत वैश्विक कमिटमेंट
डिक्लेरेशन में महिलाओं और लड़कियों के लिए सामाजिक, आर्थिक और संरचनात्मक बाधाओं को खत्म करने और महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
G20 नेताओं ने—
महिलाओं के खिलाफ हर प्रकार के भेदभाव की निंदा,
जेंडर-आधारित हिंसा खत्म करने का संकल्प,
और बीजिंग डिक्लेरेशन की 30वीं वर्षगांठ पर महिलाओं को शांति के एजेंट के रूप में मान्यता देने को दोहराया।
⚠️ आपदा से निपटने की क्षमता पर जोर
भारत की प्रेसीडेंसी के दौरान शुरू हुए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, G20 ने—
डिजास्टर रेज़िलिएंस,
तैयार फाइनेंसिंग सिस्टम,
और क्षमता निर्माण में निवेश की आवश्यकता पर बल दिया।
डिक्लेरेशन में CDRI (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) का विशेष उल्लेख किया गया।
साथ ही पैरामीट्रिक इंश्योरेंस और कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड्स जैसे आधुनिक वित्तीय टूल्स को भी आगे बढ़ाने की बात की गई।
🍽️ फूड सिक्योरिटी और पोषण: भूख मुक्त दुनिया के लिए वैश्विक आह्वान
डेक्कन हाई-लेवल प्रिंसिपल्स (DHLP) को दोहराते हुए नेताओं ने कहा—
2024 में अब भी 720 मिलियन लोग भूख का सामना कर रहे थे।
2.6 बिलियन लोग हेल्दी डाइट का खर्च नहीं उठा सकते थे।
सस्टेनेबल डेवलपमेंट लक्ष्यों के अनुरूप सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक पहुंच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
नेताओं ने भूख से स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बताते हुए अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति की अपील की।
🏥 हेल्थ और क्लाइमेट फाइनेंस: बड़े कदम, वैश्विक दृष्टि
डिक्लेरेशन में—
WHO की भूमिका और हेल्थ सिस्टम्स के लिए काफी एवं अनुमानित फाइनेंसिंग की जरूरत को स्वीकारा गया।
पेरिस एग्रीमेंट के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्लोबल क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट को अरबों से बढ़ाकर खरबों डॉलर तक बढ़ाने की अपील की गई।
यह भी स्पष्ट किया गया कि क्लाइमेट एक्शन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधा नहीं बनना चाहिए।
साथ ही, सस्टेनेबल लाइफस्टाइल (LiFE) के महत्व पर जोर दिया गया, जो भारत की एक प्रमुख वैश्विक पहल रही है।
📌 भारत के प्रभाव की स्पष्ट छाप
विशेषज्ञों का कहना है कि जोहान्सबर्ग डिक्लेरेशन यह दिखाता है कि भारत की G20 प्रेसीडेंसी ने—
सिक्योरिटी,
टेक्नोलॉजी,
जेंडर इक्वालिटी,
डिजास्टर तैयारी,
फूड सिक्योरिटी,
हेल्थ,
और क्लाइमेट एक्शन



