भगवान परशुराम की जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाती है। उन्हें चिरंजीवी माना गया है, यानी वे आज भी तपस्या में लीन हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उनका निवास महेंद्र पर्वत माना जाता है, जिसे ओडिशा या तमिलनाडु क्षेत्र से जोड़ा जाता है। कुछ किंवदंतियों के अनुसार, वे कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के गुरु बनेंगे और उन्हें शस्त्र विद्या सिखाएंगे।
महेंद्र पर्वत, जो पूर्वी घाट की श्रृंखला का हिस्सा है, को भगवान परशुराम का तपस्थल माना जाता है। हालांकि उनका कोई निश्चित भौतिक निवास नहीं माना जाता, लेकिन देशभर में उनके कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इनमें से 6 मंदिर ऐसे हैं, जिनसे जुड़ी अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
1. परशुराम महादेव मंदिर (राजस्थान)
पाली-राजसमंद सीमा पर अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित यह गुफा मंदिर समुद्र तल से करीब 3600 फीट की ऊंचाई पर है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने अपने फरसे से इस गुफा का निर्माण किया और यहां भगवान शिव की तपस्या की। गुफा में स्थित शिवलिंग पर प्राकृतिक जलधारा निरंतर अभिषेक करती रहती है।
2. परशुराम मंदिर, निरमंड (हिमाचल प्रदेश)
कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में स्थित यह मंदिर भगवान परशुराम की आज्ञापालन भावना का प्रतीक माना जाता है। यह अपनी प्राचीन लकड़ी की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। दशहरा के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
3. टांगीनाथ धाम (झारखंड)
गुमला जिले का यह धाम भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने यहां कठोर तपस्या की और अपना फरसा भूमि में गाड़ दिया था। आज भी इसके अवशेष यहां देखे जा सकते हैं।
4. परशुराम मंदिर, चिपलुन (महाराष्ट्र)
रत्नागिरी जिले के चिपलुन में स्थित यह मंदिर उस कथा से जुड़ा है, जिसमें भगवान परशुराम ने समुद्र से भूमि निकालकर बसाहट की थी। इस क्षेत्र को परशुराम भूमि भी कहा जाता है। यहां हर साल जयंती बड़े उत्साह से मनाई जाती है।
5. श्री परशुराम मंदिर, तिरुवनंतपुरम (केरल)
तिरुवल्लम में स्थित यह मंदिर त्रिवेणी संगम के पास बना है। दक्षिण भारत में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। यहां पिंडदान और तर्पण जैसे कर्मकांड भी किए जाते हैं।
6. पुरा महादेव मंदिर, मेरठ (उत्तर प्रदेश)
मेरठ के बालौनी क्षेत्र के पास स्थित इस प्राचीन मंदिर में भगवान परशुराम द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा होती है। इसे ‘परशुरामेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है और यह शिवभक्तों के लिए प्रमुख आस्था केंद्र है।
भगवान परशुराम से जुड़े ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारत की समृद्ध पौराणिक परंपराओं और लोककथाओं को भी जीवंत बनाए रखते हैं। परशुराम जयं



