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Dainik Kunj > Latest Posts > मौसम जगत > अल नीनो के कारण भारतीय मौसम में बदलाव की आशंका
मौसम जगतराष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख़बरें

अल नीनो के कारण भारतीय मौसम में बदलाव की आशंका

Roshni Bisen
Roshni Bisen
Roshni Bisen - Editor dainikkunj.com
ByRoshni Bisen
रोशनी बिसेन dainikkunj.com की संपादक हैं, जो निष्पक्ष और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित हैं।
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Published: May 23, 2026
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Contents
  • क्या है अल नीनो?
  • भारत पर अल नीनो का प्रभाव
    • 1. कमजोर मानसून
  • तापमान में वृद्धि
    • संभावित प्रभाव:
  • कृषि क्षेत्र पर असर
    • प्रमुख प्रभाव:
  • जल संकट और पर्यावरणीय प्रभाव
    • प्रभावित क्षेत्र:
  • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • आर्थिक प्रभाव:
  • सरकार और मौसम विभाग की तैयारी
    • आवश्यक कदम:

संवाददाता रोशनी बिसेन

विश्वभर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच “अल नीनो” एक ऐसी प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसका सीधा असर भारत सहित अनेक देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल नीनो विशेष चिंता का विषय बन जाता है, क्योंकि इसका सबसे अधिक प्रभाव मानसून, तापमान, कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर दिखाई देता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले समय में अल नीनो की सक्रियता भारतीय मौसम में बड़े बदलाव ला सकती है।

क्या है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में समुद्री हवाएं पश्चिम दिशा में बहती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे समुद्र का गर्म पानी पूर्वी हिस्सों में फैल जाता है और वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होने लगता है।

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“अल नीनो” स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ “छोटा बालक” या “ईसा मसीह का पुत्र” होता है। यह घटना प्रायः हर 2 से 7 वर्षों के अंतराल में देखने को मिलती है।

भारत पर अल नीनो का प्रभाव

भारत में मानसून मुख्य रूप से हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अल नीनो के सक्रिय होने पर मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे वर्षा कम होने की आशंका बढ़ जाती है।

1. कमजोर मानसून

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अल नीनो वाले वर्षों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए—

वर्षअल नीनो की स्थितिभारत में मानसून
2002मजबूत अल नीनोलगभग 19% कम वर्षा
2009मध्यम अल नीनोलगभग 22% कम वर्षा
2015प्रभावी अल नीनोसूखे जैसी स्थिति कई राज्यों में

भारत की लगभग 55% कृषि आज भी मानसून पर निर्भर है। ऐसे में वर्षा कम होने से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।

तापमान में वृद्धि

अल नीनो के दौरान गर्म हवाओं और कम वर्षा के कारण तापमान में वृद्धि होती है। देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

संभावित प्रभाव:

  • उत्तर और मध्य भारत में अत्यधिक गर्मी
  • जल स्रोतों का सूखना
  • बिजली की मांग में वृद्धि
  • स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी

वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार अल नीनो वाले वर्षों में भारत का औसत तापमान सामान्य से 0.5°C से 1°C तक अधिक हो सकता है।

कृषि क्षेत्र पर असर

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। मानसून कमजोर होने से सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता है।

प्रमुख प्रभाव:

  • धान, गेहूं, दाल और गन्ने की फसल प्रभावित
  • सिंचाई लागत में वृद्धि
  • भूजल स्तर में गिरावट
  • पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर प्रभाव

कम उत्पादन के कारण खाद्यान्न की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है।

जल संकट और पर्यावरणीय प्रभाव

कम वर्षा के कारण बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है। कई राज्यों में पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका रहती है।

प्रभावित क्षेत्र:

  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु

वनों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि अत्यधिक गर्मी और सूखा पर्यावरण को अधिक संवेदनशील बना देता है।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अल नीनो केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।

आर्थिक प्रभाव:

  • खाद्यान्न महंगाई में वृद्धि
  • ग्रामीण आय में कमी
  • कृषि आधारित उद्योग प्रभावित
  • GDP वृद्धि दर पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मानसून सामान्य से 10% कम रहता है, तो कृषि उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है।

सरकार और मौसम विभाग की तैयारी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थाएं लगातार अल नीनो की गतिविधियों पर नजर रखती हैं। सरकार द्वारा किसानों को जागरूक करने, जल संरक्षण बढ़ाने तथा सूखा प्रबंधन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

आवश्यक कदम:

  • जल संरक्षण अभियान
  • सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा
  • आधुनिक सिंचाई तकनीक
  • मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना
  • किसानों को आर्थिक सहायता
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