नई दिल्ली। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की लंबे समय से चली आ रही मांग 2029 के लोकसभा चुनाव तक पूरी हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार अगले आम चुनाव से पहले इस प्रावधान को लागू करने के लिए गंभीरता से तैयारी कर रही है और इसकी रूपरेखा पर काम शुरू हो चुका है।
दरअसल, महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने के लिए सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। हालांकि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण यह कानून अभी तक लागू नहीं हो पाया है।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में कुल 4,666 सांसदों और विधायकों में से केवल 464 यानी करीब 10% ही महिलाएं हैं। ऐसे में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 33% आरक्षण को अहम कदम माना जा रहा है।
परिसीमन से अलग करने पर विचार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्र सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सके। इसके लिए सहयोगी दलों और विपक्ष के साथ चर्चा के बाद महिला आरक्षण कानून में संशोधन कर इसे परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने की संभावना भी तलाश की जा रही है, ताकि परिसीमन में देरी होने पर भी आरक्षण लागू किया जा सके।
2027 तक पूरी हो सकती है जनगणना
अनुमान है कि देश में जनगणना की प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी हो सकती है, जिसके बाद उसके परिणाम प्रकाशित होंगे। इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में परिसीमन लागू होने में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि इस बार जनगणना डिजिटल तरीके से की जा रही है।
केंद्र सरकार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए 33% आरक्षण लागू करने को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इस दिशा में बड़ा फैसला लिया जा सकता है।



