भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मंगलवार तड़के मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान और विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पंचामृत से अभिषेक के पश्चात भांग, चंदन और आभूषणों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।
भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान और पूजन किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से भगवान का मनोहारी अलंकरण किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद मांगा।
भस्म आरती के दौरान श्रद्धालु लगातार ‘बाबा महाकाल की जय’ के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा।




