सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है तो उसे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मान्यता है कि पितरों की नाराजगी के कारण तरक्की में रुकावट, पारिवारिक कलह और आर्थिक संकट जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं।
आज 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या पर श्रद्धा से किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। यही कारण है कि पितृ दोष निवारण के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है।
ऐसे पहचानें पितृ दोष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि घर में लगातार कोई न कोई सदस्य बीमार रहता हो, परिवार में कलह बनी रहती हो, कारोबार में हानि हो रही हो या विवाह एवं संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, तो इसे पितृ दोष के संकेत माना जाता है। घर में अचानक पीपल का पौधा उग आना भी एक संकेत माना जाता है।
पितृ दोष निवारण के उपाय
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का स्मरण कर क्षमा याचना करें।
नियमित तर्पण करें और संभव हो तो ब्राह्मण भोजन करवाएं।
उपले (कंडे) पर खीर की आहुति दें।
पीपल वृक्ष पर जल अर्पित कर पांच प्रकार की मिठाई चढ़ाएं।
भगवान विष्णु का पूजन कर सात बार परिक्रमा करें।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए ये उपाय पितरों को प्रसन्न करते हैं और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं।



