PM Modi Celebrated Pongal: केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के घर पीएम मोदी ने मनाया पोंगल, पूजा-अर्चना कर गाय को खिलाया चारा
आज यानी 14 जनवरी को देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न पर्व मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में मकर संक्रांति की धूम है, वहीं दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु में पोंगल का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पोंगल उत्सव में भाग लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार सुबह केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री एल मुरुगन के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पोंगल समारोह में हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने पूजा-अर्चना की और इसके बाद गाय को चारा खिलाया। इस दौरान तमिल संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पोंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और परिश्रम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने तमिल संस्कृति को भारत की साझा और समृद्ध विरासत बताते हुए इसके वैश्विक महत्व पर भी जोर दिया।
पीएम मोदी की इस सहभागिता को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक माना जा रहा है। समारोह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया भर में रहने वाला तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति को पसंद करने वाले लोग पोंगल को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं भी उन लोगों में शामिल हूं जो पोंगल को पूरे उल्लास के साथ मनाते हैं।” पीएम ने बताया कि पोंगल का त्योहार हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्व सिखाता है और जमीन व सूर्य के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है।
पोंगल हमें कृतज्ञता का भाव सिखाता है
प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति में पोंगल अत्यंत खुशी का पर्व है, जो किसानों की कड़ी मेहनत का उत्सव है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। पोंगल हमें सिखाता है कि कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे जीवन का हिस्सा बनाया जाए। धरती हमें जो देती है, उसकी रक्षा और सम्मान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि बीते एक वर्ष में उन्हें तमिल संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला, जो उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। उन्होंने गंगईकोंड चोलपुरम के 1000 साल पुराने मंदिर में दर्शन को भी अपने लिए सौभाग्य बताया।
क्या है पोंगल?
पोंगल दक्षिण भारत की तमिल संस्कृति का प्रमुख त्योहार है, जिसकी जड़ें खेती और कृषि जीवन से जुड़ी हैं। फसल कटकर जब घर आती है, वही समय उत्सव का रूप ले लेता है। पोंगल नई शुरुआत और तमिल नववर्ष के आगमन का प्रतीक माना जाता है। सूर्यदेव की उपासना के साथ इस पर्व की शुरुआत होती है। इस अवसर पर घरों को सजाया जाता है, दरवाजों पर पूक्कलम (रंगोली) बनाई जाती है और गाय-बैलों को नहला-धुलाकर सजाया जाता है।
छठ, दिवाली और होलिका दहन जैसी परंपराओं का मेल
पोंगल बिहार की छठ पूजा की तरह चार दिनों तक मनाया जाने वाला पारिवारिक पर्व है, जिसमें परिवार के सदस्यों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी शामिल होते हैं।
पहला दिन भोगी पोंगल, दूसरा दिन थाई पोंगल, तीसरा दिन कन्नम पोंगल और चौथा दिन मट्टू पोंगल कहलाता है। इन दिनों में सूर्य, पशुधन और खेती से जुड़े औजारों की पूजा की जाती है, जो भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाता है।



