जबलपुर। मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के कदम को सही ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों के इंपैनलमेंट और नवीनीकरण की प्रक्रिया राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है, जिसमें अदालत का हस्तक्षेप सीमित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी निजी अस्पताल को इंपैनलमेंट या नवीनीकरण को लेकर कोई आपत्ति है, तो वे स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
अदालत ने यह भी माना कि सरकार द्वारा तय किए गए मानक और शर्तें मरीजों को बेहतर इलाज और पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए जरूरी हैं। इस फैसले के बाद आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट की प्रक्रिया को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, जबलपुर निवासी देवेंद्र दत्त ने इस फैसले को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में NABH सर्टिफिकेशन को अनिवार्य किए जाने को गलत ठहराया गया था। हालांकि, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि NABH सर्टिफिकेट का उद्देश्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना के तहत इंपैनलमेंट या नवीनीकरण से यदि किसी निजी अस्पताल को आपत्ति है, तो वे व्यक्तिगत रूप से अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं। जनहित याचिका के जरिए इस नीतिगत फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती।
कोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार और आयुष्मान योजना के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
याचिका में 23 सितंबर से 10 अक्टूबर 2025 के बीच जारी मध्य प्रदेश के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि NABH सर्टिफिकेट को अनिवार्य करने की शर्तों से छोटे और मध्यम अस्पतालों को नुकसान होगा और उनकी इंपैनलमेंट प्रक्रिया प्रभावित होगी।
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NABH सर्टिफिकेट का उद्देश्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी निजी अस्पताल को इंपैनलमेंट या नवीनीकरण में व्यक्तिगत समस्या है, तो वे सीधे अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।
कोर्ट के इस फैसले के बाद आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट की प्रक्रिया को बड़ी राहत मिली है और योजना के क्रियान्वयन में किसी तरह की बाधा नहीं आने की संभावना है।



