UGC की फर्जी यूनिवर्सिटी सूची 2026 जारी: देश में 36 अवैध संस्थान, दिल्ली की 13 यूनिवर्सिटी शामिल
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली को शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन हाल ही में जारी University Grants Commission (UGC) की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। यूजीसी के अनुसार देशभर में कुल 36 विश्वविद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें वैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है। इनमें दिल्ली की 13 यूनिवर्सिटी शामिल हैं, जो बिना मान्यता के संचालित हो रही हैं।
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि इन संस्थानों द्वारा दी जाने वाली डिग्री किसी भी सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षा में मान्य नहीं होगी। आयोग ने छात्रों और अभिभावकों को सावधानी बरतने और प्रवेश से पहले विश्वविद्यालय की मान्यता की पुष्टि करने की सलाह दी है।
दिल्ली में सबसे अधिक फर्जी विश्वविद्यालय
फर्जी संस्थानों की सूची में दिल्ली शीर्ष पर है। इनमें आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस (अलीपुर), कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड (दरियागंज), यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी, ADR-Centric Juridical University (राजेंद्र प्लेस), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट, आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (रोहिणी), वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी (पीतमपुरा), इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग (कोटला मुबारकपुर), माउंटेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (नेहरू प्लेस) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशन (जनकपुरी) जैसे नाम शामिल हैं।
अन्य राज्यों में भी अवैध संस्थान
दिल्ली के अलावा हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पुडुचेरी और केरल में भी कई फर्जी विश्वविद्यालय संचालित पाए गए हैं। इनमें गांधी हिन्दी विद्यापीठ (प्रयागराज), भारतीय शिक्षा परिषद (लखनऊ), नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (अलीगढ़), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन (कोलकाता), ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु) और सेंट जॉन यूनिवर्सिटी (केरल) जैसे संस्थान शामिल हैं।
छात्रों के लिए सख्त चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि इन फर्जी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना छात्रों के करियर और आर्थिक भविष्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। लाखों रुपये की फीस और वर्षों की मेहनत बेकार हो सकती है। यूजीसी ने सलाह दी है कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता स्थिति आधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य जांच लें।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती फर्जीवाड़े की घटनाओं के बीच यह सूची छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है।



