भारत में युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले एक चिंताजनक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन गए हैं। 2014 और 2019 के बीच दिल के दौरे के मामलों में लगभग 50% की वृद्धि देखी गई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2022 में अकेले मामलों में 12.5% की वृद्धि हुई, जिससे 32,457 मौतें हुईं।
यहाँ इस विषय पर एक विस्तृत समाचार रिपोर्ट है:
भारत में हृदय रोग का alarming trend: युवा तेजी से हो रहे हैं हार्ट अटैक का शिकार
नई दिल्ली: एक समय में हृदय रोग को वृद्धावस्था की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल गई है। भारत में, विशेषकर युवा वयस्कों में, दिल के दौरे (heart attacks) के मामलों में खतरनाक वृद्धि देखी जा रही है, जो एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गई है।
आंकड़ों की जुबानी
डेटा एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है:
- भारत में हर 33 सेकंड में एक व्यक्ति हृदय संबंधी बीमारी से मरता है।
- देश में कुल मौतों में से 28% हृदय संबंधी रोगों के कारण होती हैं।
- हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में से 50% 50 साल से कम उम्र के लोगों में होती हैं, और लगभग 25% मामले 40 साल से कम उम्र के व्यक्तियों में होते हैं।
- 2014 और 2019 के बीच भारत में दिल के दौरे के मामलों में लगभग 50% की वृद्धि दर्ज की गई थी।
युवाओं में बढ़ते मामलों के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीयों में हृदय रोग अन्य जातीय समूहों की तुलना में 5 से 10 साल पहले विकसित होने की आनुवंशिक प्रवृत्ति होती है। इस आनुवंशिक कारक के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली के चुनाव इस वृद्धि में प्रमुख योगदानकर्ता हैं:
- अस्वास्थ्यकर जीवनशैली: जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी (बैठकर काम करना), और खराब नींद की आदतें प्रमुख कारक हैं।
- तनाव और चिंता: काम और शैक्षणिक दबाव से उत्पन्न पुराना तनाव (क्रोनिक स्ट्रेस) रक्तचाप को बढ़ाता है और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
- धूम्रपान और शराब: यहां तक कि कभी-कभार धूम्रपान या शराब का सेवन भी हृदय रोग के जोखिम को काफी बढ़ा देता है।
- अन्य स्वास्थ्य स्थितियां: मोटापा, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), मधुमेह (डायबिटीज), और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां अब जीवन में बहुत पहले दिखाई दे रही हैं।
- वायु प्रदूषण: वायु प्रदूषण को भी हृदय संबंधी प्रतिकूल परिणामों, जैसे हृदय विफलता और इस्केमिक हृदय रोग से जोड़ा गया है।
बचाव और जागरूकता
डॉक्टरों का सुझाव है कि नियमित स्वास्थ्य जांच (विशेषकर पारिवारिक इतिहास वाले लोगों के लिए) और जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव करके इस जोखिम को कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से परहेज, और तनाव प्रबंधन स्वस्थ हृदय के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मिनी हार्ट अटैक, जिसे नॉन-एसटी-एलीवेशन मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (NSTEMI) भी कहा जाता है, एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है। इसके लक्षण अक्सर सामान्य हार्ट अटैक (STEMI) के समान होते हैं, लेकिन इसकी गंभीरता थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि इसे “मिनी” कहा जाता है, यह अभी भी हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है और भविष्य में एक बड़े हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
मिनी हार्ट अटैक के लक्षण सामान्य हार्ट अटैक जैसे ही लग सकते हैं, और इनमें शामिल हो सकते हैं:
- सीने में तकलीफ या दबाव: छाती के केंद्र या बाईं ओर बेचैनी, दबाव, कसाव या भारीपन महसूस होना।
- दर्द जो फैल सकता है: दर्द सीने से शुरू होकर हाथ (अक्सर बायां हाथ), जबड़े, गर्दन, पीठ या पेट तक फैल सकता है।
- सांस लेने में तकलीफ: बिना किसी exertion के सांस फूलना।
- अन्य लक्षण: पसीना आना, मतली (जी मिचलाना), चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
चूंकि ये लक्षण गैस या सामान्य असुविधा जैसे लग सकते हैं, लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। किसी भी प्रकार के सीने में दर्द या संबंधित लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि लक्षण 5 मिनट से अधिक समय तक बने रहते हैं, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है। समय पर निदान और उपचार हृदय को होने वाले नुकसान को कम कर सकता है और जान बचा सकता है।
कैसे पहचानें मिनी हार्ट अटैक? डॉक्टर EKG और ब्लड टेस्ट की मदद से करते हैं पुख्ता पहचान
नई दिल्ली: “मिनी हार्ट अटैक” (Mini Heart Attack) या नॉन-एसटी-एलीवेशन मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (NSTEMI) के लक्षण अक्सर सामान्य हार्ट अटैक (STEMI) जैसे ही होते हैं, जिससे घर पर लक्षणों के आधार पर सटीक पहचान करना मुश्किल होता है। सीने में दबाव, दर्द, सांस की तकलीफ, पसीना आना और मतली जैसे लक्षण दोनों में समान रूप से दिखाई दे सकते हैं।
चूंकि लक्षण मिलते-जुलते हैं, इसलिए डॉक्टर पुख्ता तौर पर यह पहचान करने के लिए विशेष नैदानिक परीक्षणों (diagnostic tests) का उपयोग करते हैं कि क्या हुआ है:
मिनी हार्ट अटैक की पहचान के लिए मुख्य परीक्षण:
- इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (EKG या ECG):
यह एक त्वरित और दर्द रहित परीक्षण है जो हृदय की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। एक सामान्य (major) हार्ट अटैक अक्सर EKG में विशिष्ट बदलाव (जिसे एसटी-एलीवेशन कहा जाता है) दिखाता है। हालांकि, मिनी हार्ट अटैक के मामलों में, EKG रीडिंग अक्सर सामान्य दिख सकती है या केवल सूक्ष्म बदलाव दिखा सकती है। - ब्लड टेस्ट (रक्त परीक्षण):
यह निदान का सबसे निर्णायक तरीका है। जब हृदय की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होती हैं, तो वे रक्तप्रवाह में कुछ एंजाइम और प्रोटीन छोड़ती हैं, जिन्हें ‘कार्डियक बायोमार्कर’ (जैसे ट्रोपोनिन) कहा जाता है।- डॉक्टर रक्त में इन ट्रोपोनिन स्तरों की जांच करते हैं।
- उच्च स्तर यह पुष्टि करते हैं कि हृदय की मांसपेशियों को नुकसान हुआ है, भले ही EKG सामान्य हो।
मिनी हार्ट अटैक को सामान्य गैस या तनाव समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यह तत्काल चिकित्सा ध्यान देने योग्य एक आपात स्थिति है। यदि आपको या आपके किसी परिचित को ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं (जैसे 108) को कॉल करें या निकटतम अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में जाएं। समय पर निदान और उपचार जीवन बचा सकता है।



