पश्चिम बंगाल: SIR फॉर्म न भरकर ममता बनर्जी ने फिर छेड़ा नया विवाद, नागरिकता साबित करने से किया इनकार
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Integrated Revision – SIR) फॉर्म भरने की प्रक्रिया 11 दिसंबर को समाप्त हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह फॉर्म भरने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने इस कदम को नागरिकता और स्वाभिमान का मुद्दा बनाते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है।
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन और अपडेशन के लिए SIR प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके तहत सभी मतदाताओं को अपनी जानकारी सत्यापित करनी थी। 11 दिसंबर अंतिम तिथि थी। इस प्रक्रिया के खिलाफ शुरू से ही मुखर रहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि उन्होंने यह फॉर्म नहीं भरा है।
ममता बनर्जी का बयान: ‘अपमानजनक है नागरिकता साबित करना’
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने अब तक SIR फॉर्म नहीं भरा है। यह मेरी नागरिकता पर सवाल उठाने जैसा है, जो कि बेहद अपमानजनक है। मैं भारत की नागरिक हूं और मुझे किसी को यह साबित करने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि वह इस तरह के किसी भी फॉर्म को भरकर खुद को अपमानित महसूस नहीं करेंगी।
राजनीतिक सरगर्मी तेज, वोटर लिस्ट से कट सकता है नाम?
ममता बनर्जी के इस फैसले से राज्य की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। नियमों के अनुसार, यदि कोई मतदाता निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करता है, तो उसका नाम संशोधित मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं, जो अगले सात दिनों के भीतर संशोधित वोटर लिस्ट जारी करेगा।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चुनाव आयोग मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है, या यह मामला एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप लेता है।
प्रमुख बिंदु:
- बयान पर विवाद: मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक जनसभा में SIR प्रक्रिया को अपनी नागरिकता पर सवाल उठाने जैसा बताया और इसे अपमानजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया के तहत कोई फॉर्म नहीं भरेंगी।
- बीजेपी का दावा: बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि लोगों को गुमराह करने के बावजूद, ममता बनर्जी ने एक वैध मतदाता बने रहने के लिए अंतिम दिन अपना विधिवत भरा हुआ और हस्ताक्षरित फॉर्म जमा कर दिया।
- चुनाव आयोग की स्थिति: चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा नियमों के तहत, जन प्रतिनिधि और सरकारी पदों पर बैठे व्यक्तियों के नाम मौजूदा मतदाता सूची में बने रहते हैं, भले ही वे स्वयं फॉर्म जमा न करें।
- राजनीतिक लड़ाई: टीएमसी ने शुरू से ही SIR प्रक्रिया का विरोध किया है, इसे “अराजक और खतरनाक” बताया है और आरोप लगाया है कि यह भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए एक “बैकडोर एनआरसी” (NRC) है।
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, जहां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची संशोधन एक बड़ा मुद्दा बन गया है।



