भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
नई दिल्ली: नागरिकता सत्यापन में पासपोर्ट के उपयोग को लेकर जारी बहस के बीच विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पासपोर्ट का उद्देश्य भारत से विदेश जाने वाले लोगों की यात्रा को विनियमित करना है। उन्होंने 24 जून 2026 को पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर भी यही बात दोहराई थी, जब चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल उठे थे।
जायसवाल ने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने भी पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना था। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट पुलिस और अन्य आवश्यक सत्यापन के बाद जारी किया जाता है, लेकिन इसका उद्देश्य नागरिकता प्रमाणित करना नहीं है। उनके अनुसार, देश के 8% से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जनहित में आवश्यकता होने पर केंद्र सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसी कारण पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
हालांकि, मंत्रालय के इस बयान पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पूछा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य होगा। विपक्ष ने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।



