इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और इंदौर शहर कांग्रेस के बीच की खटास शुक्रवार को एक बार फिर दिखी, जब शहर कांग्रेस ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में अपने वरिष्ठ नेता को न्यौता तक नहीं दिया।
दिग्विजय सिंह और शहर अध्यक्ष के बीच खटास जारी
27 सितंबर को दिग्विजय सिंह सीतलामाता बाजार पहुंचे थे, जहां उन्होंने मुस्लिम कर्मचारियों को दुकानों से हटाने के विरोध में प्रदर्शन किया था। सिंह ने शहर कांग्रेस अध्यक्ष चौकसे को भी वहां बुलाया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। अगले ही दिन गांधी भवन में हुई बैठक में चौकसे ने सख्त लहजे में कहा था कि बाहर से आने वाले नेता बिना अनुमति आयोजन नहीं कर सकते। इसके बाद से दोनों के बीच दूरी बढ़ गई। कुछ कांग्रेस नेताओं ने चौकसे के खिलाफ राहुल गांधी को पत्र लिखकर शिकायत भी की थी।
अब एक महीने बाद जब दिग्विजय सिंह फिर इंदौर आए, तो न शहर कांग्रेस ने उन्हें बुलाया और न ही वे शहर अध्यक्ष के किसी कार्यक्रम में शामिल हुए। हालांकि चौकसे ने सफाई देते हुए कहा कि “दिग्विजय सिंह की व्यस्तताएं थीं, इसलिए वे हमारे आयोजन में शामिल नहीं हो सके और बाद में माल्यार्पण करने पहुंचे।”
दिग्विजय का चुनाव आयोग पर निशाना
इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग देश बांटने की प्रक्रिया में शामिल हो गया है। अब नागरिकों को खुद यह प्रमाण देना पड़ रहा है कि वे भारतीय हैं या नहीं। जबकि मतदाता सूची में नाम जोड़ना आयोग की जिम्मेदारी है। भाजपा के इशारे पर संवैधानिक संस्थाएं पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रही हैं।”



