नई दिल्ली। देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और डीपफेक कंटेंट का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस बीच Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) से जुड़ी कई फर्जी खबरों के फैलने पर संगठन ने चिंता जताई है।
संघ के अनुसार, सोशल मीडिया पर AI से बनाए गए वीडियो, फर्जी लेटर और एडिटेड बयानों के जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। संगठन का कहना है कि इनका उद्देश्य मतदाताओं को गुमराह करना और राजनीतिक लाभ पहुंचाना हो सकता है। RSS ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसे ठीक से जांचें और क्रॉस-चेक करें।
फर्जी खबरों की सूची जारी
संघ ने हाल ही में ऐसी फर्जी खबरों की एक सूची भी जारी की है, जिसमें उसके शीर्ष पदाधिकारियों और कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम से प्रसारित गलत सूचनाओं को शामिल किया गया है। संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य जनता को सतर्क करना है ताकि वे भ्रामक प्रचार से बच सकें।
‘सेना के भगवाकरण’ वाला फर्जी वीडियो वायरल
फरवरी महीने में Mohan Bhagwat का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें कथित रूप से “सेना का भगवाकरण करना है” कहते हुए दिखाया गया। जांच में यह वीडियो पूरी तरह फर्जी पाया गया और बताया गया कि इसे AI तकनीक से तैयार किया गया था।
इसी तरह, प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़े बयान भी एडिट कर गलत तरीके से प्रसारित किए गए। संघ के अनुसार, AI तकनीक के जरिए चेहरों के हावभाव और आवाज में बदलाव कर फर्जी कंटेंट तैयार किया जा रहा है।
डीपफेक से बढ़ी चिंता
संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल अब गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसके जरिए न सिर्फ वीडियो, बल्कि फर्जी दस्तावेज और पत्र भी तैयार किए जा रहे हैं।
हाल ही में एक फर्जी पत्र वायरल हुआ, जिसमें Mohan Bhagwat द्वारा प्रधानमंत्री को लेकर कथित शिकायत का दावा किया गया था। संघ ने स्पष्ट किया कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी है और इसका उद्देश्य राजनीतिक भ्रम फैलाना था।
इसके अलावा, रक्षा मंत्री Rajnath Singh के नाम से भी एक एडिटेड वीडियो प्रसारित किया गया, जिसे तथ्य-जांचकर्ताओं ने गलत और भ्रामक बताया है।
संघ ने कहा है कि इस तरह की डिजिटल जालसाजी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।



