कोलकाता। Amit Shah ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी संकेत दिया है। उन्होंने साफ किया कि अगर Bharatiya Janata Party सत्ता में आती है, तो राज्य का अगला मुख्यमंत्री “बंगाल का बेटा” ही होगा।
घोषणापत्र जारी करने के दौरान शाह ने दो अहम ऐलान किए। पहला, भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। दूसरा, मुख्यमंत्री पद के लिए किसी बाहरी चेहरे को नहीं, बल्कि एक बंगाली नेता को मौका दिया जाएगा।
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शाह ने कहा कि वे जनता को भरोसा दिलाते हैं कि राज्य का नेतृत्व स्थानीय व्यक्ति के हाथों में ही होगा। हालांकि उन्होंने किसी एक नाम का खुलासा नहीं किया।
इस दौरान सीएम चेहरे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यक्रम में शाह के साथ मौजूद Samik Bhattacharya और Suvendu Adhikari को संभावित दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य जहां लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, वहीं सुवेंदु अधिकारी राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं और पिछले चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे।
शाह ने भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज किसानों, युवाओं और महिलाओं को नई दिशा देगा और राज्य के विकास का आधार बनेगा।
इसके साथ ही शाह ने Mamata Banerjee पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा वंशवादी राजनीति में विश्वास नहीं करती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दीदी के बाद भतीजा” की राजनीति अब नहीं चलेगी।
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यह भी वादा किया है कि सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर राज्य कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का गठन किया जाएगा।
फिलहाल, शाह के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अटकलें और भी बढ़ गई हैं।



