बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन ने एक साक्षात्कार में अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें लगभग 18 महीनों तक नजरबंद जैसी स्थिति में रखा और विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी।
राष्ट्रपति शाहबुद्दीन ने कहा कि उनके दो निर्धारित विदेश दौरे रद्द कर दिए गए। एक बार उन्हें कोसोवो जाने से रोका गया, जबकि दूसरी बार कतर के अमीर के निमंत्रण पर प्रस्तावित दौरे को विदेश मंत्रालय ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि राष्ट्रपति व्यस्त हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा प्रतिबंधों के कारण देश की स्वतंत्रता के बाद से चली आ रही ईद की परंपरा भी बाधित हुई। परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्रीय ईदगाह मैदान में ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करते हैं, लेकिन उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई। शाहबुद्दीन ने कहा कि सुरक्षा विभाग के माध्यम से स्पष्ट कर दिया गया था कि वे राष्ट्रीय ईदगाह में नमाज के लिए नहीं जाएंगे।
राष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक आवास बंग भवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता था मानो वे महल में नजरबंद हों। उन्होंने यह भी कहा कि जहां मुख्य सलाहकार के रूप में यूनुस ने 14 विदेश यात्राएं कीं, वहीं उन्हें स्वास्थ्य कारणों से भी विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली।
शाहबुद्दीन ने बताया कि उनकी बायपास सर्जरी सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हुई थी और एक वर्ष बाद फॉलो-अप के लिए जाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इसे अस्वीकार कर दिया। यहां तक कि लंदन के केंब्रिज पार्कवे अस्पताल में तय अपॉइंटमेंट के बावजूद उन्हें यात्रा की इजाजत नहीं दी गई।
राष्ट्रपति के इन आरोपों के बाद देश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।



